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मलबे से वन्य संपदा को हुए नुकसान की जांच करेंगे वन दरोगा

Thu, 21 Dec 2017 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Thu, 21 Dec 2017 10:54 PM IST
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Forest deogha will check the damage done to the wild property from the debris
चंपावत में ताड़केश्वर के समीप खाई में फेंका जा रहा मलबा। - फोटो : amar ujala

 टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में बारहमासी (ऑलवैदर) सड़क की कटिंग के दौरान फेंके गए मलबे से वन्य संपदा को हुए नुकसान पर वन विभाग ने सड़क निर्माण का काम करा रही कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। बनलेख के वन दरोगा को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें पौधे और अन्य वन्य संपदा के नुकसान की आख्या देने के निर्देश दिए गए हैं।

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वन विभाग का कहना है कि चंपावत से करीब 9 किलोमीटर दूर बनलेख के पास बारहमासी सड़क की कटिंग के दौरान मलबा निर्धारित डंपिंग जोन के बजाय खाई की तरफ डालने से वन्य संपदा को नुकसान हुआ है। चंपावत के वन क्षेत्राधिकारी केसी तिवारी ने बताया कि काम करा रही कंपनी को मलबा फेंकने से हुए नुकसान पर नोटिस जारी किया गया था। मगर कंपनी द्वारा इसका कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके चलते विभाग ने कंपनी के खिलाफ पहली दिसंबर को वन अपराध पंजीकृत कर दिया था। 
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अब वन दरोगा चतुर सिंह को मामले की जांच सौंप क्षति कर आकलन करने के आदेश दिए गए हैं। इस क्षति की भरपाई संबंधित कंपनी से कराई जाएगी। वन विभाग का कहना है कि सड़क निर्माण में वनों की सुरक्षा से संबंधित अनुमन्य नियमों के क्रियान्वयन के लिए नजर रखी जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने और मलबे को तयशुदा डंपिंग जोन में नहीं फेंकने पर कार्रवाई की जाएगी।
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छीड़ापानी के पास धड़ल्ले से गिराया जा रहा मलबा
चंपावत। वन विभाग द्वारा किए जा रहे सख्ताई करने के दावे के बावजूद बारहमासी सड़क निर्माण के दौरान कायदे-कानून का जमीन में पालन नहीं हो पा रहा है। बनलेख-चंपावत के बीच छीड़ापानी के पास कई स्थानों पर मलबा खाई में धड़ल्ले से फेंका जा रहा है। इस जगह पर शीतजल मत्स्य अनुसंधान केंद्र के अलावा चाय की पौधशाला भी है। इससे वन्य संपदा के अलावा मत्स्य तालाब और चाय के पौधों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। उधर काम कराने वाली कंपनी का कहना है कि वह कटिंग के दौरान नियमों का पालन कर रही है तथा वन्य संपदा को नुकसान नहीं पहुंचा रही है।

 

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