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छीड़ापानी मत्स्य फार्म में मत्स्य बीज बांटे
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Tue, 11 Jul 2017 10:29 PM IST
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मछली पालन करना सिखाया
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। यहां छीड़ापानी स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र पर मंगलवार को मत्स्य दिवस मनाया गया। इस दौरान बनलेख, मुडियानी, दुधपोखरा, छीड़ापानी आदि गांवों के नौजवान कृषकों एवं महिलाओं ने भागीदारी की, जिन्हें मत्स्य बीज भी उपलब्ध कराया गया। किसानों को ट्राउट एवं कार्प मछलियों के टैकों की देखभाल, रंगीन उन्नत कॉमन कार्प मछलियों के बीज उत्पादन, तालाबों के पानी एवं मछलियों के स्वास्थ्य की जांच के उपाय आदि फार्म में भ्रमण दौरान दिखाए गए।
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इस दौरान वैज्ञानिक कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। इसमें कृषकों ने अपनी समस्याएं रखीं। केंद्र के वैज्ञानिकों ने समस्या के समाधान के अचित उपाय सुझाए। केंद्र प्रभारी डॉ. सुरेश चंद्रा ने सभी किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्हें मछली पालन में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
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इस दौरान केंद्र पर उत्पादित उन्नत हंगेरियन कार्प के मत्स्य बीज बांटे गए। इस दौरान वैज्ञानिक एके गिरी, डॉ. राघवेंद्र सिंह, परवेज अहमद गनी, रविंद्र कुमार, हंसा दत्त, अरुण खुल्बे, भोला दत्त मौनी, बसंती देवी, धर्म सिंह, महेश चंद्र जोशी, पुष्पा गोस्वामी, भवानी देवी, लीलाधर आदि थे।
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चंपावत। छीड़ापानी अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. चंद्रा के अनुसार देश में पहली बार 10 जुलाई 1957 को भारतीय मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. हीरालाल चौधरी, डॉ. केएच अलिकुनी ने उड़ीसा के अंगुल में इंडियन मेजर कार्प मछलियों के कृत्रिम विधि से उत्प्रेरित प्रजनन करने में सफलता पाई थी।
इस कृत्रिम प्रजनन विधि ने मछली की खेती के लिए नये द्वार खोल दिए और देश में नीली क्रांति का आगाज हुआ। इसी का परिणाम है कि आज देश मत्स्य उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। इस उल्लेखनीय सफलता की याद में प्रतिवर्ष मत्स्य कृषक दिवस के रूप में मनाया जाता है।