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नीली क्रांति में मददगार बनेगी रेनबो ट्राउट मछली!

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2020 11:03 PM IST
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Fishreis in Champawat
चंपावत के छीड़ापानी में शीतजल मत्स्यकी अनुसंधान केंद्र में शोध कार्य में लगे वैज्ञानिक। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। पर्वतीय क्षेत्रों में नीली क्रांति योजना के तहत किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से ठंडे पानी (शीत जल) की मछली के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईएआरसी) की ओर से छीड़ापानी स्थित राष्ट्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में ठंडे पानी की रेनबो ट्राउट मछली की ग्रोथ और उत्पादन बढ़ाने पर शोध कार्य किया जा रहा है। छीड़ापानी स्थित शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में रेनबो ट्राउट प्रजाति पर चंपावत और भीमताल के छह वैज्ञानिकों की टीम शोध कर रही है।
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संस्थान के प्रभारी डॉ. किशोर कुणाल ने बताया कि जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाली नदी नालों में रेनबो ट्राउट प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए ठंडे पानी में मछली रेनबो ट्राउट की ग्रोथ बढ़ाने के लिए केंद्र सरयू और रामगंगा नदी में शोध कर रही है। तीन माह तक चलने वाले इस अनुसंधान के सफल रहने पर उसका पेटेंट कराया जाएगा। जिसके तहत 15 दिसंबर तक विश्लेषण का कार्य किया जा रहा है। अनुसंधान के उचित परिणाम निकलने के बाद इसका पेटेंट कराया जाएगा। बताया कि रेनबो ट्राउट ठंडे पानी की विदेशी प्रजाति की मछली है। जो 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पाई जाती हैं।
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हंगेरियन और असीला ट्राउट प्रजाति पर हो चुके हैं शोध
शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र छीड़ापानी की ओर से अब तक हंगेरियन और असीला ट्राउट प्रजाति के विकास पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किए जा चुके हैं। जिसके बाद जिले के विभिन्न स्थानों में काश्तकारों की ओर से हंगेरियन प्रजाति और असीला ट्राउट का सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है। रेनबो ट्राउट के साथ ही इस वक्त सिल्वर कार्प, गोल्डन कार्प, ग्रास कार्प प्रजाति की मछलियों की ग्रोथ पर भी शोध हो रहा है। महाशीर मछली की प्रजाति की ग्रोथ बढ़ाने की दिशा में शोध कार्य जारी है।
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रेनबो ट्राउट मछली की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका बाजार मूल्य 1000 से 2500 रुपये किलो है। इसे देखते हुए मत्स्य अनुसंधान केंद्र छीड़ापानी की ओर से रेनबो ट्राउट प्रजाति की ग्रोथ बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है, जो किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक होगा। - डॉ. किशोर कुणाल,

प्रभारी, शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र, छीड़ापानी।
सिर्फ बहते पानी में रहती हैं रेनबो ट्राउट
चंपावत। अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. किशोर कुणाल के अनुसार रेनबो ट्राउट प्रजाति की मछलियां केवल बहते पानी में ही जीवित रहती हैं, जबकि अन्य प्रजाति की मछलियां रुके पानी में भी आसानी से रह लेती हैं।
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