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ढाई माह में लहलहा गए अदरक के खेत
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सूखीढांग क्षेत्र में लहलहाए अदरक के खेत।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना के चलते आई आफत को अवसर में बदलने के विचार को यहां अमली जामा पहनाया गया है। लॉकडाउन में जब उद्यम और खेती पर मार थी, तो ऐसे में सूखीढांग क्षेत्र ने नई राह दिखाई है। यहां पहली बार अप्रैल में 200 नाली खाली पड़ी जमीन पर अदरक की खेती की। करीब ढाई महीने में ये खेत लहलहाने लगे हैं।
जिला सहायक निबंधक (एआर) सुरेंद्र पाल ने बताया कि राज्य समेकित योजना के तहत धूरा की बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति की ओर से सूखीढांग क्षेत्र में 200 नाली जमीन पर शुरू की गई अदरक की खेती की शानदार ग्रोथ हुई है। सहकारी समिति के अध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने बताया कि लीज पर ली गई इस जमीन की जुताई करने के बाद लॉकडाउन में 50 क्विंटल बीज की बुआई की गई थी। बंजर, खाली पड़ी यह जमीन किसानों की मेहनत से लहलहा उठी है। समिति के सचिव दीनानाथ वर्मा का कहना है कि उत्पादित होने वाली इस जैविक अदरक का उपयोग मुख्य रूप से बीज के रूप में किया जाएगा। विभाग ने गैड़ाख्याली में भी 200 नाली में अदरक की खेती की है।
475 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है अदरक की खेेती
चंपावत जिले में अदरक के लिए अनुकूल हालात होने के बावजूद खेती बहुत अधिक रकबे में नहीं होती है। जिले में बमुश्किल 475 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की खेती होती है। इसमें 3848 मीट्रिक टन की पैदावार होती है। जिला उद्यान अधिकारी सतीश शर्मा का कहना है कि अदरक की आसानी से अच्छी कीमत मिलती है।
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जिला सहायक निबंधक (एआर) सुरेंद्र पाल ने बताया कि राज्य समेकित योजना के तहत धूरा की बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति की ओर से सूखीढांग क्षेत्र में 200 नाली जमीन पर शुरू की गई अदरक की खेती की शानदार ग्रोथ हुई है। सहकारी समिति के अध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने बताया कि लीज पर ली गई इस जमीन की जुताई करने के बाद लॉकडाउन में 50 क्विंटल बीज की बुआई की गई थी। बंजर, खाली पड़ी यह जमीन किसानों की मेहनत से लहलहा उठी है। समिति के सचिव दीनानाथ वर्मा का कहना है कि उत्पादित होने वाली इस जैविक अदरक का उपयोग मुख्य रूप से बीज के रूप में किया जाएगा। विभाग ने गैड़ाख्याली में भी 200 नाली में अदरक की खेती की है।
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475 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है अदरक की खेेती
चंपावत जिले में अदरक के लिए अनुकूल हालात होने के बावजूद खेती बहुत अधिक रकबे में नहीं होती है। जिले में बमुश्किल 475 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की खेती होती है। इसमें 3848 मीट्रिक टन की पैदावार होती है। जिला उद्यान अधिकारी सतीश शर्मा का कहना है कि अदरक की आसानी से अच्छी कीमत मिलती है।
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