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बजट ऐसा हो किसान न मोड़े खेती से मुंह
ब्यूरो/अमर उजाला,चंपावत
Updated Sun, 21 Feb 2016 10:19 PM IST
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जय जवान-जय किसान वाले देश के किसान अमूमन बजट को लेकर खास उम्मीद नहीं बांधते, मगर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों के हितैषी होने के वादे से किसानों में आस जगी है। किसानों का कहना है कि बजट में कम से कम ऐसे प्रावधान तो हो, जो किसानों को खेती की ओर उन्मुख कर सकें।
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मिले खेती का पूरा दाम
किसान धरम सिंह पुजारी का कहना है कि किसानी अब कतई मुनाफे का काम नहीं रह गया है। बीज से लेकर खाद तक के दाम आसमान छू रहे हैं। किसानों को खेती का पूरा दाम दिया जाए।
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पहाड़-मैदान के लिए बने अलग नीति
जोध सिंह रावत का कहना है कि मैदान और पहाड़ की खेती में बुनियादी फर्क है। इस अंतर को बजट में भी अभिव्यक्त होना चाहिए। पहाड़ के लिए कृषि नीति ही अलग बनाई जानी चाहिए।
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हर खेतिहर का हो फसल बीमा
भैरव सिंह का कहना है कि किसान कभी अधिक बारिश, तो कभी सूखे की चपेट में आते हैं। ऐसे में अनिवार्य फसल बीमा जरूरी है। बड़े ही नहीं लघु किसान को भी फसल बीमा के दायरे में लाया जाए।
जंगली जानवर से हो बचाव
सुंदर सिंह का कहना है कि पहाड़ की खेती मौसम के बाद अब जंगली जानवरों की चुनौती से जूझ रही है। जंगली जानवरों से बचाव के लिए ऐसी नीति बने, जिससे किसान खेती से मुंह न मोड़े।
मौसमी मार से बचाव का बंदोबस्त हो
किसान मोहन राम का कहना है कि किसान को बीज, खाद ही नहीं कृषि उपकरण भी सस्ते में मिले। सिंचाई की पुख्ता बंदोबस्त हो, ताकि मौसमी मार से किसान की मेहनत पानी होने से बच सके।