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आठ मिनट तक चली बग्वाल में बरसे फल-फूल और पत्थर
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:12 PM IST
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बग्वाल खेलने के बाद आपस में गले मिलते बग्वाली वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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देवीधुरा (चंपावत)। देवीधुरा के खोलीखांड दुबाचौड़ा मैदान में सोमवार को दिलचस्प बग्वाल हुई। बग्वाल से कुछ देर पहले बारिश थमने से मौसम बेहद खुशगवार हो गया। अपरान्ह 2.42 बजे मंदिर के पंडित भुवन जोशी द्वारा की गई शंखध्वनि के साथ बग्वाल का श्रीगणेश हुआ। करीब आठ मिनट तक चली बग्वाल में फल, फूल के अलावा बाद में पत्थरों की भी बरसा हुई। बग्वाल खत्म करने के संकेत के बावजूद करीब आधा मिनट तक पत्थर बरसाए गए। 50 हजार से अधिक लोगों ने बग्वाल का नजारा देखा। बग्वाल के दौरान 11 बग्वाली वीरों समेत 334 लोग घायल हुए।
मैदान में प्रवेश करने से पूर्व सभी चारों खामों के योद्धाओं ने मां बज्र बाराही का जयकारा किया। सबसे पहले वालिक खाम के बग्वाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह बिष्ट (61) के नेतृत्व में 1.50 बजे रणक्षेत्र में प्रवेश किया। फिर गंगा सिंह चम्याल (72) के नेतृत्व में 1.58 बजे चम्याल खाम के वीर, इसके बाद त्रिलोक सिंह बिष्ट (88) के नेतृत्व में 2.20 बजे गहड़वाल खाम के वीर रणक्षेत्र में उतरे। अंत में वीरेंद्र लमगड़िया (37) के नेतृत्व में लमगड़िया खाम के वीरों ने मैदान प्रवेश किया। मां बज्र बाराही के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद चारों खामों के वीरों ने अपना-अपना मोर्चा संभाला। भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा और पाटी के पूर्व ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने भी बग्वाल खेली।
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मैदान के मंदिर वाली दिशा से वालिक खाम ने फल-फूल बरसा कर बग्वाल का शुभारंभ किया। इस खाम के साथ लमगड़िया खाम भी मौजूद था। जबकि दूसरी दिशा में चम्याल और गहड़वाल खाम मोर्चा ले रहा था। कुछ ही देर बाद सभी चारों खामों ने पत्थर बरसाना शुरू किया। मंदिर के पुजारी धर्मानंद जोशी ने 2.50 बजे रणक्षेत्र में पहुंचकर चंवर झूलाकर बग्वाल समाप्त होने का संकेत किया। बग्वाल समाप्त करने का संकेत मिलने के आधा मिनट बाद तक पत्थर बरसे। इसके बाद बग्वाल पर विराम लग गया। बग्वाल समाप्ति के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने आपस में गले मिलकर कुशल क्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए मां के दरबार में मत्था टेका।
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बग्वाल में दौरान 11 बग्वाली वीरों सहित कुल 334 लोग घायल हुए। जिनका चिकित्सा शिविर में इलाज किया गया। लमगड़िया खाम के साथ मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, उपाध्यक्ष आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह, वालिक खाम की ओर से राम सिंह कैड़ा, मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट, चेतन भैय्या, चम्याल खाम में लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल और गहड़वाल खाम की ओर से जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि प्रमुख योद्धा थे। वैसे 200 से अधिक लोगों ने बग्वाल में शिरकत की। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होेने से लोग मां बाराही मंदिर की गुंबद में चढ़कर भी बग्वाल का नजारा देखते रहे। खोलीखांड दुबाचौड़ के आसपास के मकानों की छतें बारिश के बावजूद दर्शकों से खचाखच भरी हुई थी। बग्वाल शुरू होने से पूर्व पंडित कीर्ति शास्त्री और गोकुल जोशी ने मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना की। पूजा में चारों खामों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
शिक्षा मंत्री पांडेय समेत कई लोग पहुंचे थे
बग्वाल देखने के लिए प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, विधानसभा के उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा, पूर्व सांसद बलराज पासी, केसी सिंह बाबा, डॉ.महेंद्र पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया के अलावा डीएम डा.अहमद इकबाल, एसपी आरसी राजगुरु, मेला मजिस्ट्रेट सीमा विश्वकर्मा, मेलाधिकारी राजेश कुमार, सीईओ आरसी पुरोहित समेत कई लोग पहुंचे हुए थे।
निसंतान महिलाओं ने रात भर पूजा-अर्चना की
देवीधुरा (चंपावत)। मां बाराही धाम के नंद घर में बुधवार रात भर निसंतान महिलाओं ने हाथ में अक्षत तथा पुष्प लेकर मां ब्रज बाराही की आराधना की। चारों खामों के प्रमुखों की ओर से रात भर यहां देवी मूर्ति को पहरा दिया गया। लोक मान्यताओं के अनुसार यहां श्रद्धा भाव से बाराही मां की आराधना करने वाली निसंतान महिलाओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
बारिश के बीच किए मां के दर्शन
देवीधुरा (चंपावत)। बारिश के बावजूद मां बाराही मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ का आलम यह था कि मंदिर से लेकर खोलीखाड़ दुबाचौड़ तक खचाखच लोग भरे हुए थे। लोग छाता ओढ़कर लाइन में काफी समय तक इंतजार करते रहे। पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ शास्त्री ने बताया कि हजारों लोगों ने देवी दरबार में मत्था टेका।