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अमर उजाला अभियान:और हुनर से दूर हुए तल्लादेश के नौजवान!
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मंच जीआईसी में तल्लादेश का बंद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान।
- फोटो : CHAMPAWAT
नेपाल सीमा से लगा तल्लादेश आईटीआई सिर्फ दो साल में बंद हो गया। मंच गांव के जीआईसी के दो कमरों में चले इस संस्थान में दिसंबर 2017 से बाकायदा ताला लटक गया है। ये संस्थान चला भी तो इलैक्ट्रीशियन, मशीनिस्ट और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन तीन स्वीकृत ट्रेडों में से मात्र एक इलैक्ट्रीशियन से ही चला।
मंच के 6 छात्रों ने आखिरी बार इलैक्ट्रीशियन ट्रेड के दूसरे वर्ष के नवंबर 2017 में टनकपुर आईटीआई में इम्तिहान दिए था। उस परीक्षा के बाद से दिसंबर 2017 से यह आईटीआई पूरी तरह से छात्रविहीन हो चुका है। सितंबर 2015 को खुले मंच आईटीआई में अनुदेशक की तैनाती नहीं होने से संचालन के दौरान भी चंपावत आईटीआई से अनुदेशक को भेजा गया।
देखरेख के लिए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी अभी भी यहां तैनात है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी सुमित का कहना है कि वे यहां रखे सामान और उपकरण की हिफाजत का जिम्मा संभाल रहे हैं। ग्राम प्रधान पूजा महरा सहित यहां के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस आईटीआई से उम्मीद तो थी कि क्षेत्र के युवाओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी लेकिन खराब हालात के चलते उनकी ये आस भी टूट गई है। पढ़ाने वालों की कमी के चलते छात्र यहां प्रवेश लेने से कन्नी काट रहे हैं।
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1.95 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा आईटीआई भवन
मंच/चंपावत। तल्लादेश का आईटीआई भले ही लंबे समय से बंद है लेकिन यहां इसका भवन तेजी से बन रहा है। 195.47 लाख रुपये से बनने वाली इस इमारत की भूतल व पहली मंजिल बन भी चुकी है। ऐसे में इस इमारत के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनुदेशक की तैनाती नहीं होना आया आड़े
मंच/चंपावत। चंपावत आईटीआई के प्रभारी राजेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि निदेशालय ने 2017 में नया निर्देश जारी किया था जिसका असर तल्लादेश के आईटीआई पर भी पड़ा।
निदेशालय के निर्देश के मुताबिक किसी भी आईटीआई में किसी भी ट्रेड में नए प्रवेश तभी किए जाएंगे जब पिछले साल की छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश होने के साथ ही संबंधित ट्रेड के अनुदेशक की तैनाती भी हो। तल्लादेश के आईटीआई में न तो दाखिले हुए और न ही अनुदेशक थे। इस कारण यह बंद हो गया।
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मंच के 6 छात्रों ने आखिरी बार इलैक्ट्रीशियन ट्रेड के दूसरे वर्ष के नवंबर 2017 में टनकपुर आईटीआई में इम्तिहान दिए था। उस परीक्षा के बाद से दिसंबर 2017 से यह आईटीआई पूरी तरह से छात्रविहीन हो चुका है। सितंबर 2015 को खुले मंच आईटीआई में अनुदेशक की तैनाती नहीं होने से संचालन के दौरान भी चंपावत आईटीआई से अनुदेशक को भेजा गया।
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देखरेख के लिए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी अभी भी यहां तैनात है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी सुमित का कहना है कि वे यहां रखे सामान और उपकरण की हिफाजत का जिम्मा संभाल रहे हैं। ग्राम प्रधान पूजा महरा सहित यहां के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस आईटीआई से उम्मीद तो थी कि क्षेत्र के युवाओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी लेकिन खराब हालात के चलते उनकी ये आस भी टूट गई है। पढ़ाने वालों की कमी के चलते छात्र यहां प्रवेश लेने से कन्नी काट रहे हैं।
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1.95 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा आईटीआई भवन
मंच/चंपावत। तल्लादेश का आईटीआई भले ही लंबे समय से बंद है लेकिन यहां इसका भवन तेजी से बन रहा है। 195.47 लाख रुपये से बनने वाली इस इमारत की भूतल व पहली मंजिल बन भी चुकी है। ऐसे में इस इमारत के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनुदेशक की तैनाती नहीं होना आया आड़े
मंच/चंपावत। चंपावत आईटीआई के प्रभारी राजेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि निदेशालय ने 2017 में नया निर्देश जारी किया था जिसका असर तल्लादेश के आईटीआई पर भी पड़ा।
निदेशालय के निर्देश के मुताबिक किसी भी आईटीआई में किसी भी ट्रेड में नए प्रवेश तभी किए जाएंगे जब पिछले साल की छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश होने के साथ ही संबंधित ट्रेड के अनुदेशक की तैनाती भी हो। तल्लादेश के आईटीआई में न तो दाखिले हुए और न ही अनुदेशक थे। इस कारण यह बंद हो गया।