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अगस्त क्रांति में जेल गए स्वर्गीय दुर्गा दत्त ओली को याद किया
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अगस्त क्रांति के योद्धा पंडित दुर्गादत्त ओली (फाइल फोटो)।
- फोटो : LOHAGHAT
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देश को आजादी दिलाने में अंग्रेजों के हाथ खेतीखान में 9 अगस्त 1942 को गिरफ्तार हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दुर्गा दत्त ओली को लोगों ने याद किया। इस दौरान ओली की पुत्रवधु पार्वती ओली को भी सम्मानित किया गया।
खेतीखान के इंद्रा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अगस्त क्रांति के गवाह और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के पर्सनल असिस्टेंट वयोवृद्ध सीएल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1897 में खेतीखान में दुर्गा दत्त ओली का जन्म हुआ।
युवा अवस्था में जब उन्होंने जालियांवाला बाग कांड की दास्तां सुनी तो देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा हो गया। अंग्रेजों ने 21 सितंबर 1930 को उन्हें एक साल के लिए बरेली जेल में डाल दिया। 9 अगस्त सन 1942 को अंग्रेजों ने ओली को खेतीखान से गिरफ्तार कर लिया गया। डॉ. एलडी ओली ने बताया कि जेल से छूटने के बाद भी वह भारत को आजादी दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
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इस दौरान लोगों ने खेतीखान के कई सेनानियों को याद करके उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर राजेश ओली, डॉ. एलडी ओली, पंकज ओली, केशव ओली, भैरव वर्मा, गोपाल मनराल, नवीन वर्मा, धनश्याम कलखुड़िया, नवीन बोहरा, नरेश जुकरिया आदि मौजूद रहे।
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खेतीखान के इंद्रा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अगस्त क्रांति के गवाह और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के पर्सनल असिस्टेंट वयोवृद्ध सीएल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1897 में खेतीखान में दुर्गा दत्त ओली का जन्म हुआ।
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युवा अवस्था में जब उन्होंने जालियांवाला बाग कांड की दास्तां सुनी तो देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा हो गया। अंग्रेजों ने 21 सितंबर 1930 को उन्हें एक साल के लिए बरेली जेल में डाल दिया। 9 अगस्त सन 1942 को अंग्रेजों ने ओली को खेतीखान से गिरफ्तार कर लिया गया। डॉ. एलडी ओली ने बताया कि जेल से छूटने के बाद भी वह भारत को आजादी दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
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इस दौरान लोगों ने खेतीखान के कई सेनानियों को याद करके उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर राजेश ओली, डॉ. एलडी ओली, पंकज ओली, केशव ओली, भैरव वर्मा, गोपाल मनराल, नवीन वर्मा, धनश्याम कलखुड़िया, नवीन बोहरा, नरेश जुकरिया आदि मौजूद रहे।