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रख रखाव की कमी से सूर्य मंदिर के भवन को खतरा
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:49 PM IST
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उत्तर दिशा की ओर झुकता लोहाघाट के मड गांव स्थित प्रसिद्घ सूर्य मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
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रखरखाव की कमी कई प्राचीन धरोहरों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। इनकी ओर किसी का ध्यान न जाने से यहां के ऐतिहासिक भवन खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। लोहाघाट विकासखंड के ग्राम पंचायत शीलिंग के मड़ तोक में स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर की भी कोई देखरेख न होने के चलते इसका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। यह मंदिर धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर झुकता जा रहा है। इसमें दरारें आनी शुरू हो गई हैं।
ग्रामीणों द्वारा इस मंदिर के भवन की जर्जर हालत की जानकारी दिए जाने के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी कई बार मंदिर का निरीक्षण भी कर चुके हैं। लेकिन इसके संरक्षण की दिशा में अभी तक कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर झुक रहा है। उन्होंने पुरातत्व विभाग की ओर मंदिर के भवन की मरम्मत पर कोई ध्यान न दिए जाने पर आक्रोश जताया।
कई बार उठाई जा चुकी हैं आवाज
मंदिर के पुजारी शंकरदत्त पांडेय का कहना है कि मंदिर की जर्जर हालत को देखते हुए 1992 से लगातार इसकी मरम्मत के लिए जिलाधिकारी, विधायक, संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग से मांग की जाती रही है। लेकिन मंदिर के जीर्णोद्धार और उसे संरक्षित करने के लिए अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यहां के मंदिरों में रखी मूर्तियां खंडित होने की कगार में पहुंच चुकी हैं।
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कोट
मंदिर के सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग से आग्रह किया गया है। जीर्णोद्धार का काम धन अवमुक्त होने के बाद शुरू हो सकेगा।
डॉ.चंद्र सिंह चौहान
प्रभारी अधिकारी, पुरातत्व विभाग।
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ग्रामीणों द्वारा इस मंदिर के भवन की जर्जर हालत की जानकारी दिए जाने के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी कई बार मंदिर का निरीक्षण भी कर चुके हैं। लेकिन इसके संरक्षण की दिशा में अभी तक कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर झुक रहा है। उन्होंने पुरातत्व विभाग की ओर मंदिर के भवन की मरम्मत पर कोई ध्यान न दिए जाने पर आक्रोश जताया।
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कई बार उठाई जा चुकी हैं आवाज
मंदिर के पुजारी शंकरदत्त पांडेय का कहना है कि मंदिर की जर्जर हालत को देखते हुए 1992 से लगातार इसकी मरम्मत के लिए जिलाधिकारी, विधायक, संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग से मांग की जाती रही है। लेकिन मंदिर के जीर्णोद्धार और उसे संरक्षित करने के लिए अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यहां के मंदिरों में रखी मूर्तियां खंडित होने की कगार में पहुंच चुकी हैं।
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मंदिर के सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग से आग्रह किया गया है। जीर्णोद्धार का काम धन अवमुक्त होने के बाद शुरू हो सकेगा।
डॉ.चंद्र सिंह चौहान
प्रभारी अधिकारी, पुरातत्व विभाग।