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रीठा साहिब के जोड़ मेले में लगातार दूसरी बार संशय के बादल
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चंपावत। देशभर में विख्यात रीठा साहिब गुरुद्वारे में लगातार दूसरी बार जोड़ मेले को लेकर संशय है। कोविड के चलते पिछले साल भी यह मेला नहीं हो सका था। और इस बार भी तारीख तय होने के बावजूद कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेला संचालन मुश्किल है। सामान्य रूप से तीन दिनी जोड़ मेले में दो लाख से अधिक लोग आते हैं।
पिछले महीने हुई बैठक में इस बार 24 से 26 मई तक जोड़ मेला कराने का निर्णय हुआ था। इसके लिए गुरुद्वारा प्रबंध समिति नानकमत्ता के अध्यक्ष बाबा रंजीत सिंह सहित एक उच्च स्तरीय दल ने मौका मुआयना भी किया था। तब समिति ने कोविड संबंधी निर्देशों के तहत मेले के आयोजन की बात कही थी, लेकिन एकाएक कोरोना की तेज होती दूसरी लहर के कारण अब मेले पर असमंजस है। रीठा साहिब गुरुद्वारे के इतिहास में कोरोना लॉकडाउन के कारण पिछले साल पहली बार जोड़ मेला नहीं हुआ था।
नगर से 75 किमी दूर रीठा साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की साधना और चमत्कारों का समागम रहा है। वर्ष 1505 में खुद गुरु नानक जी ने यहां आध्यात्मिक चमत्कार दिखाए थे। तब से यहां के कड़ुवे रीठे मीठे हो गए थे। यही रीठे प्रसाद में श्रद्धालुओं को दिए जाते हैं। लधिया और रतिया नदी के संगम पर स्थित रीठा साहिब को यह गुरुद्वारा देश-विदेश में पहचान दिलाता है।
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कोरोना की तेज होती दूसरी लहर में अगर कमी नहीं आई, तो इस बार भी जोड़ मेले को स्थगित करना पड़ सकता है। अलबत्ता इसका निर्णय नानकमत्ता की गुरुद्वारा प्रबंध समिति लेगी। इस वक्त सबसे बड़ी सेवा कोरोना संक्रमितों की मदद करने से लेकर लोगों की जिंदगी को बचाने में सहयोग करना है। यही सच्चा धर्म और कर्म है।
- बाबा श्याम सिंह, प्रबंधक, गुरुद्वारा, रीठा साहिब।
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पिछले महीने हुई बैठक में इस बार 24 से 26 मई तक जोड़ मेला कराने का निर्णय हुआ था। इसके लिए गुरुद्वारा प्रबंध समिति नानकमत्ता के अध्यक्ष बाबा रंजीत सिंह सहित एक उच्च स्तरीय दल ने मौका मुआयना भी किया था। तब समिति ने कोविड संबंधी निर्देशों के तहत मेले के आयोजन की बात कही थी, लेकिन एकाएक कोरोना की तेज होती दूसरी लहर के कारण अब मेले पर असमंजस है। रीठा साहिब गुरुद्वारे के इतिहास में कोरोना लॉकडाउन के कारण पिछले साल पहली बार जोड़ मेला नहीं हुआ था।
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नगर से 75 किमी दूर रीठा साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की साधना और चमत्कारों का समागम रहा है। वर्ष 1505 में खुद गुरु नानक जी ने यहां आध्यात्मिक चमत्कार दिखाए थे। तब से यहां के कड़ुवे रीठे मीठे हो गए थे। यही रीठे प्रसाद में श्रद्धालुओं को दिए जाते हैं। लधिया और रतिया नदी के संगम पर स्थित रीठा साहिब को यह गुरुद्वारा देश-विदेश में पहचान दिलाता है।
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कोरोना की तेज होती दूसरी लहर में अगर कमी नहीं आई, तो इस बार भी जोड़ मेले को स्थगित करना पड़ सकता है। अलबत्ता इसका निर्णय नानकमत्ता की गुरुद्वारा प्रबंध समिति लेगी। इस वक्त सबसे बड़ी सेवा कोरोना संक्रमितों की मदद करने से लेकर लोगों की जिंदगी को बचाने में सहयोग करना है। यही सच्चा धर्म और कर्म है।
- बाबा श्याम सिंह, प्रबंधक, गुरुद्वारा, रीठा साहिब।