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लोहाघाट राजकीय पॉलीटेक्निक से हो रहा छात्रों का मोहभंग

Wed, 14 Feb 2018 10:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत Updated Wed, 14 Feb 2018 10:35 PM IST
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Disillusioned students from Lohaghat political polytechnic
पानी की कमी के चलते बंद पड़ा लोहाघाट राजकीय पॉलीटेक्निक का छात्रावास। - फोटो : अमर उजाला
 उत्तर प्रदेश के दौर के लोहाघाट के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान से छात्रों का मोहभंग होते जा रहा है। 1978 में स्थापित इस संस्थान में गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर पड़ रहे असर से बीते चार वर्षों से छात्रों की संख्या में लगातार कम हो रही है। स्टाफ की भी भारी कमी है। तीन ट्रेडों के मुख्य अनुदेशकों को दूसरे संस्थानों में संबद्ध किया गया है।
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लोहाघाट का राजकीय पॉलीटेक्निक उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने संस्थानों में से एक है। मगर अब इस संस्थान की चमक गायब है। स्टाफ व संसाधनों की कमी से न केवल व्यावसायिक गुणवत्ता में कमी आ रही है, बल्कि छात्र संख्या भी घट रही है। चार वर्ष में यहां 14 छात्र कम हो गए हैं। स्टाफ की भी भारी कमी है। पांच ट्रेडों में से तीन ट्रेडों के मुख्य अनुदेशक दूसरे पॉलीटेक्निक संस्थानों से संबद्ध हैं।
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फार्मेसी के मुख्य अनुदेशक चंपावत, सिविल अभियंत्रण के बरम और इलेक्ट्रानिक्स ट्रेड के मुख्य अनुदेशक बेरीनाग राजकीय पॉलीटेक्निक से संबद्ध है। वहीं स्थायी अनुदेशकों की भी कमी है। 16 अनुदेशकों में से 10 ही तैनात हैं। छात्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो उनके भविष्य की चुनौतियों को बढ़ा सकती है। प्राचार्या रचना सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों के आदेश से तीन मुख्य अनुदेशक अन्यत्र संबद्ध किए गए हैं। अलबत्ता 8 अनुदेशकों को संविदा में रखकर  शिक्षण कार्य सुचारु किया गया है।
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लोहाघाट पॉलीटेक्निक में छात्र संख्या का ब्यौरा
वर्ष                 छात्र संख्या
2014                442
2015                434
2016                430
2017                428

पानी की किल्लत के चलते खाली करा दिए छात्रावास
लोहाघाट राजकीय पॉलीटेक्निक के 30 छात्राओं और 60 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास पिछले साल जुलाई से सूने पड़े हैं। वहीं 50 छात्राओं के लिए बना नया छात्रावास भी पेयजल की किल्लत के चलते शुरू नहीं हो सका है। पेयजल की भारी किल्लत से यहां रहने वाले छात्र अब किराये में रह रहे हैं। किराये में रहने के चलते इन छात्र-छात्राओं को यह नुकसान हो रहा है।
छात्रावास छोड़ दूसरी जगह किराये में रहने वाले छात्र सूरजनाथ गोस्वामी, सचिन कुमार, पंकज धानिक, अमित कुमार, प्रतिभा पाटनी, प्रियंका प्रजापति, प्रेमा बिष्ट आदि का कहना है कि किराये की राशि में ही उन्हें करीब 12 सौ रुपये महीने का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं पॉलीटेक्निक को प्रति छात्र मिलने वाले प्रति माह के 400 रुपये का नुकसान हो रहा है। अगस्त 2016 में भारी बारिश से पॉलीटेक्निक के लिए शंखपाल से बनाई गई पेयजल योजना ध्वस्त होने से यहां संकट शुरू हुआ था। पॉलीटेक्निक में रोजाना औसतन 15 हजार लीटर से अधिक पानी की जरूरत है। मगर उपलब्धता आधी भी नहीं हो पा रही है।

कोट
पॉलीटेक्निक संस्थान में पानी की आपूर्ति के लिए नलकूप का प्रस्ताव है। इसके लिए शासन से 15 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। यह रकम जल संस्थान को दे दी गई है। संस्थान टेंडर प्रक्रिया शुरू कर रहा है। नलकूप का काम पूरा होने के बाद पेयजल संकट दूर हो जाएगा।
-रचना सिंह, प्राचार्या, राजकीय पॉलीटेक्निक, लोहाघाट।
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