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Champawat News: डिप्टेश्वर झील का प्रस्ताव आईआईटी ने खारिज किया
Sun, 21 May 2023 11:06 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 21 May 2023 11:06 PM IST
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कोलीढेक झील में नौकायन का लुत्फ उठाते सैलानी। संवाद
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चंपावत। चंपावत जिले को झील नगरी बनाने की कवायद में देरी हो रही है। छह साल पहले दो झीलों डिप्टेश्वर और कूर्म सरोवर का एलान हुआ, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। आईआईटी रूड़की की ओर से डिप्टेश्वर झील की बुनियादी को कम करने का सुझाव दिया गया है। अब इन संशोधनों के बाद फिर प्रस्ताव आईआईटी को भेजा जाएगा।
श्यामलाताल और कोलीढेक झील ने चंपावत जिले को नई पहचान दी है। इसमें दो नई झील और बनाई जानीं थीं। चंपावत में डिप्टेश्वर झील और यहां से आठ किलोमीटर दूर सिमल्टा गांव में कूर्म सरोवर बनाने का 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। डीपीआर और आगणन बनने के बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब आईआईटी रुड़की ने डिप्टेश्वर झील की बुनियादी को 40 प्रतिशत तक कम करने के सुझाव दिए हैं। नए संशोधन के बाद सिंचाई विभाग से फिर प्रस्ताव आईआईटी को भेजेगा। इन झीलों के बनने से विकास, रोजगार और पर्यटन की संभावनाओं को पंख लगते लेकिन क्षेत्र को झील नगरी बनाने के सपने के साकार होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। डिप्टेश्वर झील के तथ्य: 1.डेढ़ किलोमीटर लंबाई, 30 मीटर चौड़ाई और 15 मीटर गहराई।
2. झील का निर्माण मुख्य रूप से गंडकी नदी के आसपास होगा लेकिन झील में कुछ हिस्सा ढकना गाड़ का भी रहेगा।
3.69 करोड़ रुपये की लागत से झील का निर्माण होगा। पत्रावली नियोजन विभाग के पास भेजी गई है।
कूर्म सरोवर के तथ्य: 1.कूर्म सरोवर करीब 150 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी होगी। 2.कूर्म सरोवर की पत्रावली मंजूरी के लिए शासन के पास है। 3.सरोवर का निर्माण 14 करोड़ रुपये की लागत से होगा।
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झील से होंगे ये लाभ:
दोनों झीलों का निर्माण पूरा होने पर बहुआयामी लाभ होगा।
सिंचाई, जल संरक्षण ही नहीं, पर्यटन को भी प्रोत्साहन होगा।
रोजगार और स्वरोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
भविष्य में पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रहेगा।
कोट डिप्टेश्वर झील की डीपीआर को आईआईटी रूड़की को भेजा गया था। आईआईटी की ओर से बुनियादी को कम करने का सुझाव दिया गया है। अब इस सुझाव पर अमल कर फिर से प्रस्ताव आईआईटी को भेजी जाएगी।
भुवन पांडेय, प्रभारी ईई, सिंचाई विभाग, लोहाघाट।
बाक्स
कोलीढेक झील में नौकायन का लुत्फ उठा रहे सैलानी
चंपावत। 3076.12 लाख रुपये से निर्मित कोलीढेक झील का इस साल 15 जनवरी को शुभारंभ हुआ था। डेढ़ किमी लंबी, 80 मीटर चौड़ी और 21 मीटर गहरी झील में नौकायन की व्यवस्था है। सैलानी भी बड़ी संख्या में नौकायन का लुत्फ भी उठा रहे हैं। पांच नौकाओं से सैलानी इसका लुत्फ उठा रहे हैं।
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श्यामलाताल और कोलीढेक झील ने चंपावत जिले को नई पहचान दी है। इसमें दो नई झील और बनाई जानीं थीं। चंपावत में डिप्टेश्वर झील और यहां से आठ किलोमीटर दूर सिमल्टा गांव में कूर्म सरोवर बनाने का 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। डीपीआर और आगणन बनने के बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब आईआईटी रुड़की ने डिप्टेश्वर झील की बुनियादी को 40 प्रतिशत तक कम करने के सुझाव दिए हैं। नए संशोधन के बाद सिंचाई विभाग से फिर प्रस्ताव आईआईटी को भेजेगा। इन झीलों के बनने से विकास, रोजगार और पर्यटन की संभावनाओं को पंख लगते लेकिन क्षेत्र को झील नगरी बनाने के सपने के साकार होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। डिप्टेश्वर झील के तथ्य: 1.डेढ़ किलोमीटर लंबाई, 30 मीटर चौड़ाई और 15 मीटर गहराई।
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2. झील का निर्माण मुख्य रूप से गंडकी नदी के आसपास होगा लेकिन झील में कुछ हिस्सा ढकना गाड़ का भी रहेगा।
3.69 करोड़ रुपये की लागत से झील का निर्माण होगा। पत्रावली नियोजन विभाग के पास भेजी गई है।
कूर्म सरोवर के तथ्य: 1.कूर्म सरोवर करीब 150 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी होगी। 2.कूर्म सरोवर की पत्रावली मंजूरी के लिए शासन के पास है। 3.सरोवर का निर्माण 14 करोड़ रुपये की लागत से होगा।
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झील से होंगे ये लाभ:
दोनों झीलों का निर्माण पूरा होने पर बहुआयामी लाभ होगा।
सिंचाई, जल संरक्षण ही नहीं, पर्यटन को भी प्रोत्साहन होगा।
रोजगार और स्वरोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
भविष्य में पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रहेगा।
कोट डिप्टेश्वर झील की डीपीआर को आईआईटी रूड़की को भेजा गया था। आईआईटी की ओर से बुनियादी को कम करने का सुझाव दिया गया है। अब इस सुझाव पर अमल कर फिर से प्रस्ताव आईआईटी को भेजी जाएगी।
भुवन पांडेय, प्रभारी ईई, सिंचाई विभाग, लोहाघाट।
बाक्स
कोलीढेक झील में नौकायन का लुत्फ उठा रहे सैलानी
चंपावत। 3076.12 लाख रुपये से निर्मित कोलीढेक झील का इस साल 15 जनवरी को शुभारंभ हुआ था। डेढ़ किमी लंबी, 80 मीटर चौड़ी और 21 मीटर गहरी झील में नौकायन की व्यवस्था है। सैलानी भी बड़ी संख्या में नौकायन का लुत्फ भी उठा रहे हैं। पांच नौकाओं से सैलानी इसका लुत्फ उठा रहे हैं।