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कैलपाल मंदिर में डोला यात्रा के साथ हुआ मेले का समापन
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चंपावत के दियूरी में कैलपाल मंदिर से डोला यात्रा ले जाते ग्रामीण।
- फोटो : CHAMPAWAT
जिले के दूरस्थ क्षेत्र दियूरी के कैलपाल मंदिर में हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाले एक दिनी मेले का मंगलवार को डोला यात्रा के साथ समापन हो गया। डोला यात्रा की पूर्व संध्या पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय लोगों की ओर से पुरानी परंपरा में पहाड़ी गीतों, झोड़ा, चांचरी एवं कहानी किस्सों के साथ पूरी रात भर जागरण किया गया।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदर सिंह बोहरा ने बताया कि पुरानी मान्यताओं के अनुसार सोमवार की रात्रि डोले को गांव से कैलपाल मंदिर ले जाया गया और मंगलवार को सुबह डोले को कैलपाल मंदिर से माता देवी के मंदिर में ले जाया गया। यह डोला एक साल तक फिर माता के मंदिर में ही रहता है।
कहा जाता है कि मां की इतनी शक्ति है कि जब डोला कैलपाल मंदिर को ले जाया जाता है तो वह इतना भारी हो जाता है कि सैकड़ों लोगों को ले जाना मुश्किल होता है लेकिन जब वह कैलपाल मंदिर से माता के मंदिर को जाता है तो वह फूल के समान हल्का हो जाता है।
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बुजुर्ग बताते हैं कि कैलपाल मंदिर में मां का ससुराल माना जाता है जिस कारण यह सब होता है। बताया जाता है ब्यानधुरा मंदिर की तरह ही कैलपाल मंदिर भी एक शक्ति पीठ है जहां पूजा अर्चना करने से नि:संतानों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
नवनिर्वाचित बीडीसी सदस्य ने किया भंडारे का आयोजन
चंपावत। दियूरी से निर्विरोध चुने गए क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदर सिंह बोहरा की ओर से कैलपाल मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें शामिल सभी लोगों से क्षेत्र की समस्याओं में सहयोग करने के लिए कहा गया। इस अवसर पर नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान बालम सिंह बोहरा, कमल बोहरा आदि भी मौजूद रहे।
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क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदर सिंह बोहरा ने बताया कि पुरानी मान्यताओं के अनुसार सोमवार की रात्रि डोले को गांव से कैलपाल मंदिर ले जाया गया और मंगलवार को सुबह डोले को कैलपाल मंदिर से माता देवी के मंदिर में ले जाया गया। यह डोला एक साल तक फिर माता के मंदिर में ही रहता है।
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कहा जाता है कि मां की इतनी शक्ति है कि जब डोला कैलपाल मंदिर को ले जाया जाता है तो वह इतना भारी हो जाता है कि सैकड़ों लोगों को ले जाना मुश्किल होता है लेकिन जब वह कैलपाल मंदिर से माता के मंदिर को जाता है तो वह फूल के समान हल्का हो जाता है।
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बुजुर्ग बताते हैं कि कैलपाल मंदिर में मां का ससुराल माना जाता है जिस कारण यह सब होता है। बताया जाता है ब्यानधुरा मंदिर की तरह ही कैलपाल मंदिर भी एक शक्ति पीठ है जहां पूजा अर्चना करने से नि:संतानों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
नवनिर्वाचित बीडीसी सदस्य ने किया भंडारे का आयोजन
चंपावत। दियूरी से निर्विरोध चुने गए क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदर सिंह बोहरा की ओर से कैलपाल मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें शामिल सभी लोगों से क्षेत्र की समस्याओं में सहयोग करने के लिए कहा गया। इस अवसर पर नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान बालम सिंह बोहरा, कमल बोहरा आदि भी मौजूद रहे।