{"_id":"5932f5ee4f1c1b55598b45ab","slug":"14965119933-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्माणाधीन दीवार गिरी, चपेट में आए मजदूर की मौत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
निर्माणाधीन दीवार गिरी, चपेट में आए मजदूर की मौत
Updated Sat, 03 Jun 2017 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
निर्माणाधीन दीवार गिरी, चपेट में आए मजदूर की मौत
पाटी (चंपावत)। पाटी के एक निजी स्कूल की निर्माणाधीन दीवार शनिवार सुबह करीब 11: 45 बजे एकाएक भरभराकर गिर गई। दीवार की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गई। जबकि एक अन्य महिला मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसे आनन-फानन में पाटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल किया गया। दीवार गिरने से स्कूल में अफरातफरी मच गई।
शनिवार को मल्लिकार्जुन स्कूल पाटी के मुख्य भवन से लगी दीवार स्कूल के ही खेल मैदान में एकाएक भरभरा कर गिर गई। 15 फीट ऊंची व 15 से 20 फीट लंबी दीवार का निर्माण कार्य लगभग दो सप्ताह से चल रहा था। शनिवार सुबह से ही जेसीबी मशीन से उसमें मिट्टी भरान का कार्य चल रहा था। दीवार गिरने से पास में ही काम कर रहे दो मजदूर मलबे की चपेट में आ गए। मलबे में छतरदयार गांव निवासी मोहन चंद्र (58) मलबे से दबकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। जेसीबी से करीब सवा घंटे तलाशने के बाद मृत मजदूर को मलबे से बाहर निकाल कर स्कूल प्रबंधन के निजी वाहन से सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉ.आभाष सिंह ने मजदूर मोहन चंद्र को मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
जबकि मलबे के नीचे दबे महिला मजदूर गंगा देवी को तत्काल मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया। घायल गंगा के सिर, पैर, हाथ एवं कमर में गंभीर चोटें आई हैं। मल्लिकार्जुन स्कूल के प्रबंधक हरीश जोशी ने कहा कि दीवार दो बार जरूर गिरी हैं। पहली बार दीवार पर मिट्टी न भरने से गिरी थी, परंतु इस बार दीवार बनाने का ठेका दिया गया था। दो साल पहले चंपावत में भी मल्लिकार्जुन स्कूल के भवन के निर्माण में एक मजदूर की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
बड़ा हादसा होने से बचा
मल्लिकार्जुन स्कूल में दीवार करीब 11: 45 बजे गिरी। अगर यह घटना 15 मिनट बाद होती तो नुकसान काफी ज्यादा हो सकता था। लोगों का कहना है कि 12 बजे से मध्यांतर अवकाश होता है। जिस कारण यहां पढ़ने वाले 200 छात्र-छात्राओं में से काफी बच्चे खेल मैदान में होते हैं। यदि यह घटना 15 मिनट बाद होती तो बड़ा हादसा हो जाता। दीवार गिरने की जानकारी मिलने पर आनन-फानन में अभिभावक बच्चों की कुशलक्षेम जानने के लिए स्कूल पहुंच गए। काफी अभिभावक इस वाकये के बाद बच्चों को अपने साथ घर ले गए।
पूर्व में भी गिर चुकी है दीवार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दीवार की गुणवत्ता ठीक न होने से यह हादसा हुआ हैं। बताया गया कि इससे पूर्व भी मिट्टी भरने से दीवार एक बार गिर चुकी है। आरोप लगाया गया कि इसे दरकिनार करते हुए फिर से उसी तरह से दीवार बना कर उसमें मिट्टी भर दी, जिससे भार पड़ने के कारण दीवार गिर गई। नागरिकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा पर खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बावजूद सुरक्षा व सुविधा की अनदेखी की जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को गाड़ियों में ठूस कर ले जाया जाता है।