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Champawat News: लकड़ी के बदले बायोमास ब्रिकेट्स से होगा शवदाह

Fri, 07 Jun 2024 11:06 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Fri, 07 Jun 2024 11:06 PM IST
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Cremation will be done with biomass briquettes instead of wood.
लोहाघाट में बायोमास बिक्रेट्स दिखाते मुंबई से आए अनुराग वेद प्रकाश वर्मा। संवाद
लोहाघाट (चंपावत)। पर्यावरण संरक्षण के लिए मुंबई की एक संस्था ने पहल शुरू कर दी है। इसके तहत पंचेश्वर में शवदाह के लिए जल्द ही लकड़ियों के स्थान पर बॉयोमास ब्रिकेट्स का इस्तेमाल होगा।
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मुंबई से आए पंजाब रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट अनुराग वेद प्रकाश वर्मा ने बताया कि संस्था के सीएमडी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल मोनीश आहूजा के दिशा निर्देशन पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए चंपावत जिले के पंचेश्वर को चुना गया है। बताया कि शवों के अंतिम संस्कार में काफी मात्रा में लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है इससे वनों पर अवैध रूप से कटान बढ़ गया है। वनों का कटान होने से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में प्रथम चरण में चंपावत के पंचेश्वर घाट को चुना है। यहां एक स्टील का पायर लगा दिया गया है। इसके तहत बॉयोमास ब्रिकेट्स से शवदाह किया जाएगा।
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एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ने बताया कि जहां एक ओर लकड़ी से शवदाह पर करीब चार से पांच क्विंटल लकड़ी की खपत होती है। वहीं 250 किलो बॉयोमास ब्रिकेट्स से शवदाह हो जाएगा। बॉयोमास की उपयोगिता को देखते हुए कई राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पालिकाओं को बॉयोमास के प्रयोग के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि बॉयोमास के प्रयोग से पर्यावरण सुरक्षित रहने के साथ पेड़ों का दोहन नहीं हो होगा। भूस्खलन को रोकने में सहायक होगा। उन्होंने बताया कि बायोमास ब्रिकेट्स गन्ना, गेहूं, पराली, मूंगफली के छिलके, मक्का के पौधों आदि से बनाया जाता है। बताया कि महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, राजस्थान, कर्नाटक आदि स्थानों में कई स्थानों के श्मशान घाटों में बायोमास ब्रिकेट्स से शवदाह किया जा रहा है। पंचेश्वर की सरपंच भवानी देवी, सरपंच प्रतिनिधि गोपाल सिंह, युवक मंगल दल अध्यक्ष कमल सिंह सामंत, गणेश सिंह आदि ने बॉयोमास ब्रिकेट्स की पहल को सराहनीय बताया।
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