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गोवंशीय पशुओं की आश्रयस्थली बनी ब्यानधुरा गोशाला
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चंपावत जिले के ब्यानधूरा में स्थित गोशाला।
- फोटो : CHAMPAWAT
वर्तमान समय में दूध न देने और पशुपालन में काम नहीं आने वाले पशुओं को आवारा छोड़ने की प्रवृत्ति विकसित हो चली है। ऐसे में जिले के दूरस्थ ब्यानधूरा में ब्यानधूरा मंदिर विकास समिति की ओर से निर्मित की गई गोशाला आवारा गोवंशीय पशुओं की आश्रय स्थली बनी है।
यहां पर 35 गायों का पालन पोषण किया जा रहा है। समिति ने दो गोशालाओं का निर्माण करने के साथ गोवंशीय पशुओं की देखभाल के लिए कर्मचारी तैनात किए हैं। मंदिर समिति के संयोजक पंडित शंकर दत्त जोशी के अनुसार आसपास के गांवों के अलावा नगरीय क्षेत्र में छोड़े गए गोवंशीय पशुओं को यहां लाकर उनकी देखभाल की जा रही है।
समिति ने ग्राम पंचायत की भूमि पर गोशाला निर्माण करने के साथ उनके चारे के लिए उचित प्रबंध किया है। समिति यहां जैविक खाद तैयार करने के साथ गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाली अन्य सामग्रियों के निर्माण की कार्ययोजना भी तैयार कर रही है।
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खच्चरों से ढोया जा रहा है पानी
चंपावत। काफी ऊंची चोटी पर स्थित होने के कारण ब्यानधूरा मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में एक भी पेयजल योजना का निर्माण नहीं हो सका है। इस कारण यहां खच्चरों के माध्यम से पीने का पानी ढोया जाता है जिसमें काफी लागत आती है। गोशाला के पशुओं को नदी-नालों में ले जाकर उनकी प्यास बुझानी पड़ती है। मंदिर समिति ने ब्यानधूरा के लिए लिफ्ट पेजयल योजना के निर्माण की मांग उठाई है।
गुलदार ने एक माह में पांच पशुओं को मारा
चंपावत। जंगल में बनाई गई गोशाला में रात में सुरक्षा के पूर्ण प्रबंध नहीं होने के कारण बीते एक माह में गुलदार ने गोशाला के पांच पशुओं को मौत के घाट उतार दिया है। गोशाला का संचालन कर रहे गणेश दत्त जोशी के अनुसार मरने वाले पांच पशुओं में दो गाभिन गायें भी शामिल हैं।
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यहां पर 35 गायों का पालन पोषण किया जा रहा है। समिति ने दो गोशालाओं का निर्माण करने के साथ गोवंशीय पशुओं की देखभाल के लिए कर्मचारी तैनात किए हैं। मंदिर समिति के संयोजक पंडित शंकर दत्त जोशी के अनुसार आसपास के गांवों के अलावा नगरीय क्षेत्र में छोड़े गए गोवंशीय पशुओं को यहां लाकर उनकी देखभाल की जा रही है।
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समिति ने ग्राम पंचायत की भूमि पर गोशाला निर्माण करने के साथ उनके चारे के लिए उचित प्रबंध किया है। समिति यहां जैविक खाद तैयार करने के साथ गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाली अन्य सामग्रियों के निर्माण की कार्ययोजना भी तैयार कर रही है।
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खच्चरों से ढोया जा रहा है पानी
चंपावत। काफी ऊंची चोटी पर स्थित होने के कारण ब्यानधूरा मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में एक भी पेयजल योजना का निर्माण नहीं हो सका है। इस कारण यहां खच्चरों के माध्यम से पीने का पानी ढोया जाता है जिसमें काफी लागत आती है। गोशाला के पशुओं को नदी-नालों में ले जाकर उनकी प्यास बुझानी पड़ती है। मंदिर समिति ने ब्यानधूरा के लिए लिफ्ट पेजयल योजना के निर्माण की मांग उठाई है।
गुलदार ने एक माह में पांच पशुओं को मारा
चंपावत। जंगल में बनाई गई गोशाला में रात में सुरक्षा के पूर्ण प्रबंध नहीं होने के कारण बीते एक माह में गुलदार ने गोशाला के पांच पशुओं को मौत के घाट उतार दिया है। गोशाला का संचालन कर रहे गणेश दत्त जोशी के अनुसार मरने वाले पांच पशुओं में दो गाभिन गायें भी शामिल हैं।

ब्यानधूरा मंदिर की गोशाला में पशुओं को मिलती है जगह।- फोटो : CHAMPAWAT