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हिमालय संरक्षण में जुटे कई वीर
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पाटी ब्लॉक में पौध लगाते ग्रामीण।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। हिमालय को बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी है और इस काम को बाएफ डेवलपमेंट फाउंडेशन के प्रभारी डॉ. दिनेश रतूड़ी बड़ी संजीदगी से कर रहे हैं। वे बीते पांच साल से पाटी ब्लॉक के खेतीखान क्षेत्र में पौधे लगाने के साथ ही जल संरक्षण के लिए भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
डॉ. रतूड़ी पाटी ब्लॉक के मानर, गोशनी, त्यारसों, गंभीरगांव, परध्यानी, बांजगांव, खलकंडिया, भगाना भंडारी और डिंगडई वन पंचायत में बांज, खरसूं, उतीस, नैपियर घास सहित जल संरक्षण करने वाले 67 हजार पौधे लगा चुके हैं।
वर्ष 2016 से शुरू इस अभियान में 99 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण कर चुके हैं। उन्होंने वन पंचायतों को प्रेरित कर पौधों के संरक्षण के लिए बाएफ के जरिये पौध सुरक्षा टीम बनाई। यह टीम पौधों की निड़ाई-गुड़ाई, खाद-पानी देने से लेकर देखभाल करती है।
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वन क्षेत्रों में नमी रखने के लिए छोटे-छोटे तालाब भी बनाए गए। जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों को पिरूल हटाने और आग लगने पर उसे बुझाने के लिए सामूहिक प्रयास के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अब इन वन पंचायतों में जंगल विकसित होने से पशुओं के लिए भरपूर चारा भी मिलने लगा है। दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी होने से यहां के लोगों की माली हालत भी बेहतर हो रहे हैं।
विकास के नाम पर पहाड़ काटने से बढ़ा खतरा
पिथौरागढ़। जिले में पर्यावरण बचाना एक चुनौती बनी हुई है। विकास के नाम पर बेतरतीब सड़क कटिंग से लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे प्रकृति का लगातार ह्रास हो रहा है। धारचूला और मुनस्यारी में आने वाली आपदाएं प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही नतीजा है।
जो आज भी एक चुनौती बना हुआ है। अगर विकास को सुनियोजित तरीके से नहीं किया गया तो वे दिन दूर नहीं जब हमें प्रकृति के आक्रोश का अलग-अलग तरह की आपदाओं से सामना करना होगा। जिसके लिए हम बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
दिनेश गुरुरानी, केएमवीएन, प्रबंधक, पिथौरागढ़
दिनेश पिछले 15 सालों से हिमालय बचाओ अभियान के तहत आदि कैलाश, कैलाश मानसरोवर यात्रियों को स्वच्छता की शपथ दिलाकर हिमालय बचाने के कार्य में जुटे हैं। पौधरोपण के माध्यम से लोगों को हिमालय की रक्षा के लिए लगातार प्रेरित करते आ रहे हैं।
मोहन चंद्र पाठक, प्रधानाचार्य, एसडीएस पिथौरागढ़
मोहन चंद्र पाठक हिमालय बचाने के लिए वर्ष 1988 से छात्रों में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। उन्होंने 2009 से पेड़-पौधों के संरक्षण के लिए होली, दीपावली, राखी को पर्यावरण से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल शुरू की।
डॉ. पीतांबर अवस्थी, सामाजिक कार्यकर्ता
डॉ. पीतांबर ने गांव-गांव जाकर नौले धारों के संरक्षण की मुहिम चलाई। इसके लिए वह लोगों को जागरूक करने के साथ ही पौधा लगाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर हिमालय नामक शीर्षक से पुस्तक लिखी है।
जगदीश भट्ट, विंग्स संस्था
जगदीश स्कूली बच्चों, ग्रामीणों में हिमालयी क्षेत्र में मिलनी वाली जैव विविधता के संरक्षण के लिए कार्यशाला और गोष्ठियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा संरक्षित और दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों और जानवरों के बारे में अध्ययन कर उन्हें संरक्षित करने के प्रयास भी उनके द्वारा किए जा रहे हैं।
मनोज मतवाल, हरेला संस्था
मनोज मतवाल पिछले कई वर्षों से हरेला संस्था के माध्यम से क्षेत्र की जैव विविधता से छात्रों को रूबरू करा रहे हैं। पेड़ों के संरक्षण के लिए लोगों में आत्मीयता का भाव जगाना जैसे कार्यों से पर्यावरण बचाने के लिए कार्य उनकी ओर से किए जा हैं।
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डॉ. रतूड़ी पाटी ब्लॉक के मानर, गोशनी, त्यारसों, गंभीरगांव, परध्यानी, बांजगांव, खलकंडिया, भगाना भंडारी और डिंगडई वन पंचायत में बांज, खरसूं, उतीस, नैपियर घास सहित जल संरक्षण करने वाले 67 हजार पौधे लगा चुके हैं।
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वर्ष 2016 से शुरू इस अभियान में 99 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण कर चुके हैं। उन्होंने वन पंचायतों को प्रेरित कर पौधों के संरक्षण के लिए बाएफ के जरिये पौध सुरक्षा टीम बनाई। यह टीम पौधों की निड़ाई-गुड़ाई, खाद-पानी देने से लेकर देखभाल करती है।
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वन क्षेत्रों में नमी रखने के लिए छोटे-छोटे तालाब भी बनाए गए। जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों को पिरूल हटाने और आग लगने पर उसे बुझाने के लिए सामूहिक प्रयास के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अब इन वन पंचायतों में जंगल विकसित होने से पशुओं के लिए भरपूर चारा भी मिलने लगा है। दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी होने से यहां के लोगों की माली हालत भी बेहतर हो रहे हैं।
विकास के नाम पर पहाड़ काटने से बढ़ा खतरा
पिथौरागढ़। जिले में पर्यावरण बचाना एक चुनौती बनी हुई है। विकास के नाम पर बेतरतीब सड़क कटिंग से लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे प्रकृति का लगातार ह्रास हो रहा है। धारचूला और मुनस्यारी में आने वाली आपदाएं प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही नतीजा है।
जो आज भी एक चुनौती बना हुआ है। अगर विकास को सुनियोजित तरीके से नहीं किया गया तो वे दिन दूर नहीं जब हमें प्रकृति के आक्रोश का अलग-अलग तरह की आपदाओं से सामना करना होगा। जिसके लिए हम बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
दिनेश गुरुरानी, केएमवीएन, प्रबंधक, पिथौरागढ़
दिनेश पिछले 15 सालों से हिमालय बचाओ अभियान के तहत आदि कैलाश, कैलाश मानसरोवर यात्रियों को स्वच्छता की शपथ दिलाकर हिमालय बचाने के कार्य में जुटे हैं। पौधरोपण के माध्यम से लोगों को हिमालय की रक्षा के लिए लगातार प्रेरित करते आ रहे हैं।
मोहन चंद्र पाठक, प्रधानाचार्य, एसडीएस पिथौरागढ़
मोहन चंद्र पाठक हिमालय बचाने के लिए वर्ष 1988 से छात्रों में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। उन्होंने 2009 से पेड़-पौधों के संरक्षण के लिए होली, दीपावली, राखी को पर्यावरण से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल शुरू की।
डॉ. पीतांबर अवस्थी, सामाजिक कार्यकर्ता
डॉ. पीतांबर ने गांव-गांव जाकर नौले धारों के संरक्षण की मुहिम चलाई। इसके लिए वह लोगों को जागरूक करने के साथ ही पौधा लगाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर हिमालय नामक शीर्षक से पुस्तक लिखी है।
जगदीश भट्ट, विंग्स संस्था
जगदीश स्कूली बच्चों, ग्रामीणों में हिमालयी क्षेत्र में मिलनी वाली जैव विविधता के संरक्षण के लिए कार्यशाला और गोष्ठियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा संरक्षित और दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों और जानवरों के बारे में अध्ययन कर उन्हें संरक्षित करने के प्रयास भी उनके द्वारा किए जा रहे हैं।
मनोज मतवाल, हरेला संस्था
मनोज मतवाल पिछले कई वर्षों से हरेला संस्था के माध्यम से क्षेत्र की जैव विविधता से छात्रों को रूबरू करा रहे हैं। पेड़ों के संरक्षण के लिए लोगों में आत्मीयता का भाव जगाना जैसे कार्यों से पर्यावरण बचाने के लिए कार्य उनकी ओर से किए जा हैं।