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कमेटी को पता नहीं और हो गई नियुक्ति
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 31 Mar 2017 10:51 PM IST
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नगर पंचायत के संविदा पर्यावरण मित्रों की स्थायी नियुक्ति के लिए शासन द्वारा गठित समिति के अनुमोदन के बिना पर्यावरण मित्रों को नियुक्ति पत्र देने का मामला सामने आया है। समिति के सदस्यों को पर्यावरण मित्रों की स्थायी नियुक्ति की भनक तक नहीं है और नगर पंचायत ने समिति के सदस्यों की सहमति के बगैर ही नियुक्ति पत्र जारी कर दिए।
नगर पंचायत में कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने का नवंबर 2017 में शासनादेश जारी किया गया था, लेकिन नगर पंचायत ने काफी समय तक इस मामले को दबाए रखा। शासनादेश की भनक लगने के बाद पर्यावरण मित्रों ने स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर कई बार कार्य बहिष्कार किया। शासन से मिले निर्देशों के अनुरूप जिलाधिकारी ने पर्यावरण मित्रों की स्थायी नियुक्ति के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की। समिति में तहसीलदार नीलू चावला, अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार के अलावा उप कोषाधिकारी को सदस्य बनाया गया।
कमेटी ने तीन बार बैठक कर संविदा पर्यावरण मित्रों से पूरी पत्रावली मांगी, लेकिन तीनों ही बैठकों में कर्मचारियों ने पत्रावली प्रस्तुत नहीं की। कर्मियों द्वारा पूरी पत्रावली तैयार करने के बाद कमेटी की बैठक करने पर सहमति जताई गई थी, लेकिन इस बीच ईओ द्वारा कमेटी को दरकिनार कर आठों पर्यावरण मित्रों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए हैं।
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नियुक्ति कमेटी को जानकारी नहीं
नियुक्ति कमेटी की अध्यक्ष नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा ने पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति के लिए नियुक्ति पत्र जारी किए जाने से अनभिज्ञता जाहिर की है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति देने के लिए किसी भी प्रकार से अपनी सहमति नहीं दी गई है। वहीं कमेटी की सदस्य तहसीलदार नीलू चावला का कहना है कि ईओ द्वारा पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने की कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में उनसे न तो कोई संपर्क किया गया और नहीं उन्हें कोई सूचना दी गई। वह अगली बैठक का इंतजार कर रही थी।
बोर्ड में प्रस्ताव कर दिए गए नियुक्ति पत्र
अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार का कहना है कि कमेटी द्वारा आयोजित तीन बैठकों में कोई समाधान न निकलने के कारण बोर्ड में प्रस्ताव कर पर्यावरण मित्रों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। कहा कि पर्यावरण मित्रों ने तुरंत नियुक्ति को लेकर कई बार आंदोलन भी किया था। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
नगर पंचायत में कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने का नवंबर 2017 में शासनादेश जारी किया गया था, लेकिन नगर पंचायत ने काफी समय तक इस मामले को दबाए रखा। शासनादेश की भनक लगने के बाद पर्यावरण मित्रों ने स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर कई बार कार्य बहिष्कार किया। शासन से मिले निर्देशों के अनुरूप जिलाधिकारी ने पर्यावरण मित्रों की स्थायी नियुक्ति के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की। समिति में तहसीलदार नीलू चावला, अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार के अलावा उप कोषाधिकारी को सदस्य बनाया गया।
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कमेटी ने तीन बार बैठक कर संविदा पर्यावरण मित्रों से पूरी पत्रावली मांगी, लेकिन तीनों ही बैठकों में कर्मचारियों ने पत्रावली प्रस्तुत नहीं की। कर्मियों द्वारा पूरी पत्रावली तैयार करने के बाद कमेटी की बैठक करने पर सहमति जताई गई थी, लेकिन इस बीच ईओ द्वारा कमेटी को दरकिनार कर आठों पर्यावरण मित्रों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए हैं।
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नियुक्ति कमेटी को जानकारी नहीं
नियुक्ति कमेटी की अध्यक्ष नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा ने पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति के लिए नियुक्ति पत्र जारी किए जाने से अनभिज्ञता जाहिर की है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति देने के लिए किसी भी प्रकार से अपनी सहमति नहीं दी गई है। वहीं कमेटी की सदस्य तहसीलदार नीलू चावला का कहना है कि ईओ द्वारा पर्यावरण मित्रों को स्थायी नियुक्ति के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने की कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में उनसे न तो कोई संपर्क किया गया और नहीं उन्हें कोई सूचना दी गई। वह अगली बैठक का इंतजार कर रही थी।
बोर्ड में प्रस्ताव कर दिए गए नियुक्ति पत्र
अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार का कहना है कि कमेटी द्वारा आयोजित तीन बैठकों में कोई समाधान न निकलने के कारण बोर्ड में प्रस्ताव कर पर्यावरण मित्रों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। कहा कि पर्यावरण मित्रों ने तुरंत नियुक्ति को लेकर कई बार आंदोलन भी किया था। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।