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सीएम की समीक्षा संवारेगी चंपावत की बीमार सेहत!
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चंपावत। कोविड से बचाव को लेकर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत सोमवार को चंपावत में समीक्षा करने से पहले डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर में तब्दील जिला अस्पताल की व्यवस्था देखेंगे। मुआयने के दौरान व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आएंगी। लेकिन इस उजियारे के बीच ऐसा काफी कुछ है, जिस पर गौर किया जाना जरूरी है। जिला अस्पताल सहित जिले के तीन अस्पतालों में 1.86 करोड़ रुपये से बने आईसीयू (सघन निगरानी इकाई) का संचालन अब भी नहीं हो पा रहा है। 15 बेड वाले इन तीन आईसीयू में नौ वेंटिलेटर लगे हैं, लेकिन अभी तक ये मरीजों के लिए उपयोग में नहीं आ सके हैं।
22 मार्च 2020 (कोरोना से बचाव को लगे जनता कर्फ्यू का दिन) से 23 मई 2021 के बीच 14 माह से अधिक का अंतराल है, लेकिन इस अवधि में जिले की सेहत में खास बदलाव नहीं हुआ। कोरोना काल से पहले और अब हालात कमोबेश एक जैसे हैं। जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर उप जिला अस्पताल में बीते 28 माह से एक्सरे की सुविधा तक मरीजों को नसीब नहीं है। तकनीशियन के नहीं होने से ये नौबत आई है।
एक्सरे की जरूरत हड्डी संबंधी रोग, निमोनिया, क्षय रोग आदि में सबसे ज्यादा होती है। अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी जुगाड़ से हो रहे हैं। इसके लिए हफ्ते में दो दिन लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट को संबद्ध किया गया है। वहीं लोहाघाट उप जिला अस्पताल के दो (निश्चेतक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट) विशेषज्ञों को दूसरे जिलों में भेजा गया है। इसके अलावा जिले में हृदयरोग विशेषज्ञ सहित आठ विशेषज्ञों के पद खाली हैं। नागरिकों का कहना है कि इन सुविधाओं की कमी से ना केवल लोगों को वक्त पर इलाज मिलने में मुश्किल होती है, बल्कि उनकी जेब पर भी मार पड़ रही है। (संवाद)
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कोट
आईसीयू के संचालन के लिए मानव संसाधनों की कमी है। जिले के तीनों केंद्रों में इसके लिए आठ डॉक्टर, 16 स्टाफ नर्स, 12 वार्ड ब्वाय और आठ स्वच्छक अलग से चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय मांग की गई है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।
नहीं हो सके ये काम:
1.चंपावत जिला अस्पताल और टनकपुर उप जिला अस्पताल के आईसीयू का संचालन शुरू नहीं हो सका।
2.स्वीकृति के बावजूद चंपावत जिला अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का काम लटका हुआ है।
3.सिस्टम लगने के बावजूद दूरदराज के चार (पाटी, पुलहिंडोला, रीठा साहिब और मंच) अस्पतालों में टेलीमेडिसन सेवा काम नहीं कर रही।
4.अप्रैल 2015 को चंपावत जिला अस्पताल को बेस अस्पताल बनाने की मंजूरी मिली, लेकिन अभी तक बेस अस्पताल के लिए जमीन तक पंजीकृत नहीं हो सकी है।
5.टनकपुर उप जिला अस्पताल में जनवरी 2019 से एक्सरे की सुविधा नहीं।
बस ये काम हुए :
1.जिले को मार्च और मई में 108 आपात सेवा की पांच एंबुलेंस मिलीं।
2.डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर बने चंपावत जिला अस्पताल में बेडों की संख्या 50 से बढ़कर 66 हुई। साथ ही 12 बेड का कोविड वार्ड भी बनाया गया।
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22 मार्च 2020 (कोरोना से बचाव को लगे जनता कर्फ्यू का दिन) से 23 मई 2021 के बीच 14 माह से अधिक का अंतराल है, लेकिन इस अवधि में जिले की सेहत में खास बदलाव नहीं हुआ। कोरोना काल से पहले और अब हालात कमोबेश एक जैसे हैं। जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर उप जिला अस्पताल में बीते 28 माह से एक्सरे की सुविधा तक मरीजों को नसीब नहीं है। तकनीशियन के नहीं होने से ये नौबत आई है।
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एक्सरे की जरूरत हड्डी संबंधी रोग, निमोनिया, क्षय रोग आदि में सबसे ज्यादा होती है। अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी जुगाड़ से हो रहे हैं। इसके लिए हफ्ते में दो दिन लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट को संबद्ध किया गया है। वहीं लोहाघाट उप जिला अस्पताल के दो (निश्चेतक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट) विशेषज्ञों को दूसरे जिलों में भेजा गया है। इसके अलावा जिले में हृदयरोग विशेषज्ञ सहित आठ विशेषज्ञों के पद खाली हैं। नागरिकों का कहना है कि इन सुविधाओं की कमी से ना केवल लोगों को वक्त पर इलाज मिलने में मुश्किल होती है, बल्कि उनकी जेब पर भी मार पड़ रही है। (संवाद)
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आईसीयू के संचालन के लिए मानव संसाधनों की कमी है। जिले के तीनों केंद्रों में इसके लिए आठ डॉक्टर, 16 स्टाफ नर्स, 12 वार्ड ब्वाय और आठ स्वच्छक अलग से चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय मांग की गई है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।
नहीं हो सके ये काम:
1.चंपावत जिला अस्पताल और टनकपुर उप जिला अस्पताल के आईसीयू का संचालन शुरू नहीं हो सका।
2.स्वीकृति के बावजूद चंपावत जिला अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का काम लटका हुआ है।
3.सिस्टम लगने के बावजूद दूरदराज के चार (पाटी, पुलहिंडोला, रीठा साहिब और मंच) अस्पतालों में टेलीमेडिसन सेवा काम नहीं कर रही।
4.अप्रैल 2015 को चंपावत जिला अस्पताल को बेस अस्पताल बनाने की मंजूरी मिली, लेकिन अभी तक बेस अस्पताल के लिए जमीन तक पंजीकृत नहीं हो सकी है।
5.टनकपुर उप जिला अस्पताल में जनवरी 2019 से एक्सरे की सुविधा नहीं।
बस ये काम हुए :
1.जिले को मार्च और मई में 108 आपात सेवा की पांच एंबुलेंस मिलीं।
2.डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर बने चंपावत जिला अस्पताल में बेडों की संख्या 50 से बढ़कर 66 हुई। साथ ही 12 बेड का कोविड वार्ड भी बनाया गया।