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Champawat News: गेहूं के क्रय केंद्र दो, सप्ताह भर में खरीद सिफर
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पिथौरागढ़ के जीआईसी मूल्यांकन केंद्र में उत्तरापुस्तिकाएं जांचते अंकेक्षक। संवाद
अधिक दाम मिलने से किसान खुले बाजार में बेच रहे गेहूं
चंपावत जिले में पिछले साल भी नहीं हुई थी गेहूं की खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए दो केंद्र बने हैं लेकिन दो सप्ताह में एक दाना भी खरीद नहीं हो सकी है। दोनों केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पीएस राणा ने बताया कि इस बार अभी तक किसान क्रय केंद्र तक गेहूं बेचने नहीं आया है। ये दोनों केंद्र 31 मई तक खुले रहेंगे।
गेहूं का सरकारी दाम 2023-24 के लए 110 रुपये बढ़ाकर 2125 रुपये किया गया है। पिछले साल गेहूं 2015 रुपये क्विंटल था। गेहूं की खरीद के लिए टनकपुर और बनबसा में बनाए गए क्रय केंद्रों में किसानों की सुविधा और व्यवस्था बनाने में हजारों रुपये खर्च होते हैं। पहली अप्रैल से केंद्र खुले होने के बावजूद गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि 2022 में भी चंपावत जिले में एक भी क्विंटल गेहूं की खरीद नहीं हो सकी थी। गेहूं की खरीद नहीं होने की वजह से खुले बाजार में अधिक कीमत बताई गई है। किसानों का कहना है कि खरीदार खेतों से 2250 रुपये से 2400 रुपये क्विंटल गेहूं ले जा रहे हैं।
मैदान में होता है 80 प्रतिशत गेहूं
चंपावत। जिले में इस साल 4657 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती की गई। इसमें 80 प्रतिशत हिस्सा मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा का है। इस साल करीब साढ़े चार हजार मीट्रिक टन पैदावार हुई।
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इन वजहों से नहीं हो सकी गेहूं की सरकारी खरीद:
1.गेहूं की खुले बाजार में 125 से 275 रुपये प्रति क्विंटल कीमत ज्यादा होना।
2.छोटी जोत होने से सरकारी क्रय केंद्र में बिक्री में व्यावहारिक दिक्कतों का होना।
3.भुगतान में होने वाली देरी।
पिछले तीन वर्ष में चंपावत जिले में हुई गेहूं की सरकारी खरीद:
2020 में 79 किसानों से 1659 क्विंटल।
2021 में 238 किसानों से 5477 क्विंटल।
2022 में शून्य
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चंपावत जिले में पिछले साल भी नहीं हुई थी गेहूं की खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए दो केंद्र बने हैं लेकिन दो सप्ताह में एक दाना भी खरीद नहीं हो सकी है। दोनों केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पीएस राणा ने बताया कि इस बार अभी तक किसान क्रय केंद्र तक गेहूं बेचने नहीं आया है। ये दोनों केंद्र 31 मई तक खुले रहेंगे।
गेहूं का सरकारी दाम 2023-24 के लए 110 रुपये बढ़ाकर 2125 रुपये किया गया है। पिछले साल गेहूं 2015 रुपये क्विंटल था। गेहूं की खरीद के लिए टनकपुर और बनबसा में बनाए गए क्रय केंद्रों में किसानों की सुविधा और व्यवस्था बनाने में हजारों रुपये खर्च होते हैं। पहली अप्रैल से केंद्र खुले होने के बावजूद गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि 2022 में भी चंपावत जिले में एक भी क्विंटल गेहूं की खरीद नहीं हो सकी थी। गेहूं की खरीद नहीं होने की वजह से खुले बाजार में अधिक कीमत बताई गई है। किसानों का कहना है कि खरीदार खेतों से 2250 रुपये से 2400 रुपये क्विंटल गेहूं ले जा रहे हैं।
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मैदान में होता है 80 प्रतिशत गेहूं
चंपावत। जिले में इस साल 4657 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती की गई। इसमें 80 प्रतिशत हिस्सा मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा का है। इस साल करीब साढ़े चार हजार मीट्रिक टन पैदावार हुई।
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इन वजहों से नहीं हो सकी गेहूं की सरकारी खरीद:
1.गेहूं की खुले बाजार में 125 से 275 रुपये प्रति क्विंटल कीमत ज्यादा होना।
2.छोटी जोत होने से सरकारी क्रय केंद्र में बिक्री में व्यावहारिक दिक्कतों का होना।
3.भुगतान में होने वाली देरी।
पिछले तीन वर्ष में चंपावत जिले में हुई गेहूं की सरकारी खरीद:
2020 में 79 किसानों से 1659 क्विंटल।
2021 में 238 किसानों से 5477 क्विंटल।
2022 में शून्य

पिथौरागढ़ के जीआईसी मूल्यांकन केंद्र में उत्तरापुस्तिकाएं जांचते अंकेक्षक। संवाद