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Champawat News: आने-जाने में 30 किमी सफर कर तल्ला देश के बच्चे पाते हैं ज्ञान

Tue, 06 May 2025 10:55 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 06 May 2025 10:55 PM IST
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Children of Talla Desh gain knowledge by travelling 30 kms to and fro
चंपावत। जिले के तल्ला देश क्षेत्र के ग्राम पंचायतों के बच्चों के लिए पढ़ाई काफी मुश्किल होती है। उन्हें रोज पढ़ाई के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। समय से उठकर विद्यालय पहुंचना और पैदल आना-जाना उनके लिए हर दिन एक जंग की तरह है।
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वाहन की कोई व्यवस्था नहीं होने से उनके लिए स्कूल पहुंचना आसान नहीं होता है। 150 बच्चों को पढ़ाई के लिए क्लस्टर विद्यालय जीआईसी तामली, मंच और धौन जाना पड़ता है। दुर्गम रास्तों से करीब सात किमी से 15 किमी पैदल चलकर विद्यालयों तक पहुंचने में बच्चों को परेशानी होती है।
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क्षेत्र में उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं होने से बच्चे शिक्षा लेने के लिए आने-जाने में 14 से 30 किमी का सफर करना पड़ता है। रमैला, हरम, दमतोला, गागरी, चौड़ी, रियासी बमनगांव, आमनी, तरकुली, सिमिया उरी, पोलप, सल्ली ग्राम पंचायत के बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं है। क्षेत्र में उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं होने से बच्चे शिक्षा लेने के लिए 20 से 30 किमी पैदल तीन क्लस्टर विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं।
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सर्दियों में तड़के उठ जाते हैं बच्चे
स्कूल जाने के लिए ग्राम पंचायतों के बच्चे करीब चार बजे उठते हैं और पांच बजे बस्ते लेकर स्कूल के लिए निकल जाते हैं। थकान से चूर बच्चे पहले स्कूल पहुंचते और फिर पढ़ाई में जुट जाते हैं। सबसे अधिक दिक्कत सर्दियों में होती है, जब बच्चे 10 बजे स्कूल पहुंचते हैं और साढ़े चार बजे छुट्टी होने पर देर शाम घर पहुंचते हैं। इस कारण क्षेत्र की अधिकांश बालिकाओं के लिए कक्षा 10 की पढ़ाई के बाद इंटर की पढ़ाई मुश्किल होती है।
कोट
जीआईसी मंच जाना आसान नहीं होता है। बारिश में सबसे अधिक दिक्कत होती है। पहाड़ी से सड़क पर मलबा आता है तो दूसरी तरफ रास्ते में कीचड़ होता है। ऐसे में पूरे कपड़े चलते-चलते खराब हो जाते हैं। वाहन की कोई सुविधा नहीं है। झुंड बनाकर जाना मजबूरी है।- सागर सिंह, छात्र, ग्राम पंचायत रमैला

तल्ला देश के स्कूली बच्चों के लिए वाहन सुविधा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 150 बच्चों को दुर्गम रास्तों से होकर स्कूल पैदल पहुंचना पड़ता है। पैदल चलकर स्कूल में पढ़ाई बच्चों के लिए आसान नहीं होती है। बच्चों के लिए वाहन की व्यवस्था के लिए प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।- दीपेश चंद्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रांम पंचायत नीड़
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