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मुख्यमंत्री जी! नए काम से पहले इन पुराने कामों को पूरा करा दें प्लीज
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चंपावत। प्रदेश के नौंवे मुख्यमंत्री के रूप में पारी शुरू कर चुके तीरथ सिंह रावत के पास मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के लिए अभी महज दस माह से भी कम समय बचा है। चंपावत जिले के लटके कामों की लंबी फेहरिस्त है। आम लोगों का मानना है कि सीएम के पास नए कामों को कराने के लिए अधिक समय नहीं है, लेकिन पुराने लटके कामों को पूरा कराने और बुनियादी सुविधाओं को दिलाने के लिए मुखरता से पहल करनी होगी।
उत्तराखंड की पहली अंतरिम सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके तीरथ सिंह रावत के संगठन के प्रदेश के मुखिया बनने के बावजूद इस क्षेत्र के आम लोगों का ज्यादा संपर्क नहीं रहा। लेकिन जिले के लोग अपने नए सीएम से बेशुमार उम्मीद लगाए हैं। लोगों का कहना है कि सीएम से न तो नए कार्यों की अपेक्षा है और न उनके पास नए कामों को पूरा करने के लिए चुनाव से पहले ज्यादा समय है। लेकिन सीएम लटके और अधूरे कार्यों को कम से कम पूरा करा सकते हैं।
2015 से शुरू चंपावत की पेयजल योजना की सुस्त चाल को रफ्तार देकर लोगों की प्यास को बुझाने की अपेक्षा कर रहे हैं। इसी तरह से सरकारी अस्पतालों के बंद पड़े आईसीयू केंद्रों को शुरू कराने से लेकर बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था का इलाज कर आम लोगों में भरोसे लायक बनाने की आस लगाए हैं। जनवरी 2017 से बंद मंच उप तहसील को खुलवाना और कर्मियों की कमी से संचालित न हो पा रही गुमदेश की उप तहसीलों में काम शुरू कराने की आस ग्रामीणों को है। विवाद और कछुआ चाल के लिए प्रदेशभर में चर्चा में रही टनकपुर-जौलजीबी सड़क के काम को रफ्तार देकर पूरा कराने के लिए सीमांत के लोगों की नजर सीएम पर है। इस सड़क में धांधली के आरोपों को लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल भी उठाते रहे।
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कोट
व्यापक अनुभव के धनी तीरथ सिंह रावत के सीएम बनने से प्रदेश के हर वर्ग को बेशुमार अपेक्षाएं हैं। उनके समग्र नजरिए से प्रदेश और जिले के विकास को गति मिलेगी।
शिवराज कठायत,
पूर्व दर्जा मंत्री, टनकपुर।
तीरथ सिंह रावत कम वक्त के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे। ऐसे में पूर्व के लटके विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाकर पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सज्जन वर्मा,
पूर्व अध्यक्ष, भेषज संघ, चंपावत।
नए मुख्यमंत्री के पास काम के लिए कम वक्त है। उम्मीद की जा सकती है कि वे इस समय का जनता की बेहतरी के लिए उपयोग करेंगे।
लक्ष्मी दत्त नरियाल, चंपावत।
नए मुख्यमंत्री को रोजगार को प्राथमिकता में शीर्ष पर रखना चाहिए। पलायन पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सशक्त करने और स्वरोजगार पर जोर देना होगा।
मंदीप ढेक,
राज्य आंदोलनकारी, चंपावत।
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उत्तराखंड की पहली अंतरिम सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके तीरथ सिंह रावत के संगठन के प्रदेश के मुखिया बनने के बावजूद इस क्षेत्र के आम लोगों का ज्यादा संपर्क नहीं रहा। लेकिन जिले के लोग अपने नए सीएम से बेशुमार उम्मीद लगाए हैं। लोगों का कहना है कि सीएम से न तो नए कार्यों की अपेक्षा है और न उनके पास नए कामों को पूरा करने के लिए चुनाव से पहले ज्यादा समय है। लेकिन सीएम लटके और अधूरे कार्यों को कम से कम पूरा करा सकते हैं।
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2015 से शुरू चंपावत की पेयजल योजना की सुस्त चाल को रफ्तार देकर लोगों की प्यास को बुझाने की अपेक्षा कर रहे हैं। इसी तरह से सरकारी अस्पतालों के बंद पड़े आईसीयू केंद्रों को शुरू कराने से लेकर बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था का इलाज कर आम लोगों में भरोसे लायक बनाने की आस लगाए हैं। जनवरी 2017 से बंद मंच उप तहसील को खुलवाना और कर्मियों की कमी से संचालित न हो पा रही गुमदेश की उप तहसीलों में काम शुरू कराने की आस ग्रामीणों को है। विवाद और कछुआ चाल के लिए प्रदेशभर में चर्चा में रही टनकपुर-जौलजीबी सड़क के काम को रफ्तार देकर पूरा कराने के लिए सीमांत के लोगों की नजर सीएम पर है। इस सड़क में धांधली के आरोपों को लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल भी उठाते रहे।
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व्यापक अनुभव के धनी तीरथ सिंह रावत के सीएम बनने से प्रदेश के हर वर्ग को बेशुमार अपेक्षाएं हैं। उनके समग्र नजरिए से प्रदेश और जिले के विकास को गति मिलेगी।
शिवराज कठायत,
पूर्व दर्जा मंत्री, टनकपुर।
तीरथ सिंह रावत कम वक्त के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे। ऐसे में पूर्व के लटके विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाकर पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सज्जन वर्मा,
पूर्व अध्यक्ष, भेषज संघ, चंपावत।
नए मुख्यमंत्री के पास काम के लिए कम वक्त है। उम्मीद की जा सकती है कि वे इस समय का जनता की बेहतरी के लिए उपयोग करेंगे।
लक्ष्मी दत्त नरियाल, चंपावत।
नए मुख्यमंत्री को रोजगार को प्राथमिकता में शीर्ष पर रखना चाहिए। पलायन पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सशक्त करने और स्वरोजगार पर जोर देना होगा।
मंदीप ढेक,
राज्य आंदोलनकारी, चंपावत।