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Champawat News: बदलाव हुआ है लेकिन समाज में घट रही है समरसता

Tue, 08 Aug 2023 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 08 Aug 2023 10:58 PM IST
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Change has happened but harmony is decreasing in the society
चंपावत। बस छह दिन और देश की आजादी को 76 साल पूरे हो जाएंगे। तब का भारत और आज का इंडिया कितना बदल गया है? क्या सपने इन सात दशकों से अधिक वक्त में उन बुजुर्गों ने संजोए थे और उसमें से कितने पूरे हुए? इन सवालों को लेकर 75 साल पार कर चुके बुजुर्ग नागरिकों से बात की तो उन्हें वे पुराने लम्हे और आज के डिजिटल दौर का अंतर साफ दिखा। कहते हैं कि विकास हो रहा है, कभी सुस्त तो कभी तेज गति से। मोटे तौर पर पुराने वक्त की दुश्वारियों के बीच आज की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ये बुजुर्ग मानते हैं तब अभाव था, सुकून था, जिंदगी में बेचैनी नहीं थी। जो कुछ था उसी में संतोष था।
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कोट
आजादी के दिन महज नौ साल की उम्र थी। गांव में रोशनी नहीं थी, रेडियो भी नहीं था। बस एक शोर था कि अंग्रेज भाग गए। पंडित जवाहर लाल नेहरू के हाथ में कमान आई तो कुछ साल में देखा कि देश ने एम्स और भाखड़ा नांगल बांध बना लिया। ये सुखद बदलाव था। फिर चीन की जंग के नतीजे से देश और देश के लोगों का मनोबल टूटा। 1965 और 1971 की जीत, पोखरन और फिर धीरे-धीरे विकास की रफ्तार से देश के विकास के साथ लोगों के विश्वास को बढ़ते देखा।
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गौरीशंकर जोशी, चंपावत।
कोट
15 अगस्त 1947 की आधी रात की बहुत धुंधली यादें हैं। हम सब बच्चे, परिवार और गांवों के बड़े लोग खुश थे। तब गांव में उजाला नहीं था। लैंप के उजाले से पढ़ते हुए आगे बढ़े। नौकरी की। देश के अलग-अलग हिस्सों में काम के दौरान तरक्की और खेती की लहलहाती फसलों को देखा। और आज हमने तमाम विरोधाभासों के बावजूद तरक्की की है। लेकिन ये तरक्की शहर से गांवों के लोगों तक भी पहुंचने का इंतजार है।
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चिंतामणि, बाराकोट।
कोट
आजादी के शुरुआती दौर में तेजी से औद्योगिक क्षेत्र में तरक्की हुई। सार्वजनिक क्षेत्रों के चार इस्पात कारखाने भी लगे। हरित क्रांति से खाने की कमी दूर हुई। विकास हुआ, लेकिन विसंगतियां भी हुई। आर्थिक असमानता और सांप्रदायिक और जातीय द्वेष ने भी कुलाचे मारे। निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के बावजूद आर्थिक वितरण में तर्कपूर्ण समानता न होना खतरनाक है।
बची सिंह रावत, लोहाघाट।
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