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तेजपत्ता मसालों से होगी चंपावत की नई पहचान
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चंपावत। जड़ीबूटी के लिए चंपावत जिला बेहद मुफीद है। और अब इसमें चंपावत जिले को तेजपत्ता मसाला नई पहचान देगा। एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत चयनित किए जाने के बाद तेजपत्ता की नर्सरी से लेकर खेती में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही व्यवसायिक खेती होने से उद्यमिता और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
जिले में होने वाली विभिन्न जड़ीबूटियों में से एक-तिहाई खेती अकेले तेजपत्ता की होती है। इस वक्त यहां 945 नाली क्षेत्रफल में तेजपत्ता की खेती की जा रही है। जिसमें करीब दो हजार क्विंटल उत्पादन हुआ। श्यामलाताल, सूखीढांग, सिन्याड़ी, धुरा, नौलापानी, अमोड़ी, स्वांला, धौन, दियूरी, स्याली, सिप्टी, रौसाल, फुंगर, बाराकोट, पाटी आदि जगहों के 400 से अधिक काश्तकार तेजपत्ता की खेती से जुड़े हैं। दिगालीचौड़, बिंडातिवारी और बांकू में नई पौधशालाओं को प्रस्तावित करने के बाद अब तेजपत्ता की मौजूदा वित्त वर्ष में पांच इकाइयों की स्थापना होगी।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) से जिले में तेजपत्ता की पांच इकाइयां स्थापित की जाएंगी। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि योजना के तहत हर इकाई के लिए 35 प्रतिशत या अधिकतम दस लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा। प्रमुख काश्तकार रमेश चौड़ाकोटी सहित तमाम जड़ीबूटी उत्पादकों का कहना है कि निजी क्षेत्रों में इन इकाइयों के लगने से तेजपत्ता के बाजार का विस्तार होगा। उन्हें बाजार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और व्यावसायिक खेती को बल मिलेगा। (संवाद)
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पीएमएफएमई योजना से कुमाऊं के जिलों में लगेंगी इन उत्पादों की इकाइयां
चंपावत:तेजपत्ता, पिथौरागढ़:हल्दी, बागेश्वर:कीवी, अल्मोड़ा:खुमानी, ऊधमसिंह नगर: आम और नैनीताल -स्वकैश।
कोट
चंपावत जिले में तेजपत्ता की खेती बहुतायत में हो रही है। लेकिन एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत चयनित होने के बाद यहां दूसरे जड़ीबूटी उत्पादक भी तेजपत्ता की ओर आकर्षित होंगे। इसकी इकाइयों के लगने से तेजपत्ता का मूल्य संवर्द्धन होगा।
एडवोकेट अशोक चौधरी, अध्यक्ष, जड़ीबूटी भेषज संघ।
मसालों के अलावा औषधीय उपयोग भी
चंपावत। तेजपत्ता का सबसे ज्यादा उपयोग मसालों के रूप में होता है। लेकिन इसमें औषधीय गुण भी कम नहीं हैं। भेषज विभाग के जिला समन्वयक कमलेंद्र यादव का कहना है कि तेजपत्ता के चूर्ण की चाय सर्दी-जुकाम का कारगर उपाय है। इसे पीसकर आंख में लगाने से आंख के धुंधलेपन में राहत मिलती है। साथ ही तेजपत्ता दमा और श्वांस रोग में भी बेहद असरकारक औषधि है।
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जिले में होने वाली विभिन्न जड़ीबूटियों में से एक-तिहाई खेती अकेले तेजपत्ता की होती है। इस वक्त यहां 945 नाली क्षेत्रफल में तेजपत्ता की खेती की जा रही है। जिसमें करीब दो हजार क्विंटल उत्पादन हुआ। श्यामलाताल, सूखीढांग, सिन्याड़ी, धुरा, नौलापानी, अमोड़ी, स्वांला, धौन, दियूरी, स्याली, सिप्टी, रौसाल, फुंगर, बाराकोट, पाटी आदि जगहों के 400 से अधिक काश्तकार तेजपत्ता की खेती से जुड़े हैं। दिगालीचौड़, बिंडातिवारी और बांकू में नई पौधशालाओं को प्रस्तावित करने के बाद अब तेजपत्ता की मौजूदा वित्त वर्ष में पांच इकाइयों की स्थापना होगी।
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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) से जिले में तेजपत्ता की पांच इकाइयां स्थापित की जाएंगी। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि योजना के तहत हर इकाई के लिए 35 प्रतिशत या अधिकतम दस लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा। प्रमुख काश्तकार रमेश चौड़ाकोटी सहित तमाम जड़ीबूटी उत्पादकों का कहना है कि निजी क्षेत्रों में इन इकाइयों के लगने से तेजपत्ता के बाजार का विस्तार होगा। उन्हें बाजार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और व्यावसायिक खेती को बल मिलेगा। (संवाद)
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पीएमएफएमई योजना से कुमाऊं के जिलों में लगेंगी इन उत्पादों की इकाइयां
चंपावत:तेजपत्ता, पिथौरागढ़:हल्दी, बागेश्वर:कीवी, अल्मोड़ा:खुमानी, ऊधमसिंह नगर: आम और नैनीताल -स्वकैश।
कोट
चंपावत जिले में तेजपत्ता की खेती बहुतायत में हो रही है। लेकिन एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत चयनित होने के बाद यहां दूसरे जड़ीबूटी उत्पादक भी तेजपत्ता की ओर आकर्षित होंगे। इसकी इकाइयों के लगने से तेजपत्ता का मूल्य संवर्द्धन होगा।
एडवोकेट अशोक चौधरी, अध्यक्ष, जड़ीबूटी भेषज संघ।
मसालों के अलावा औषधीय उपयोग भी
चंपावत। तेजपत्ता का सबसे ज्यादा उपयोग मसालों के रूप में होता है। लेकिन इसमें औषधीय गुण भी कम नहीं हैं। भेषज विभाग के जिला समन्वयक कमलेंद्र यादव का कहना है कि तेजपत्ता के चूर्ण की चाय सर्दी-जुकाम का कारगर उपाय है। इसे पीसकर आंख में लगाने से आंख के धुंधलेपन में राहत मिलती है। साथ ही तेजपत्ता दमा और श्वांस रोग में भी बेहद असरकारक औषधि है।