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चीन में प्रकाशित हुआ चंपावत के राजेंद्र का शोध पत्र
उजाला ब्यूरो चंपावत।
Updated Wed, 26 Sep 2018 10:57 PM IST
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राजेंद्र कुमार जोशी, शोधार्थी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के लोहाघाट तहसील के बडौली गांव के राजेंद्र कुमार जोशी का शोध पत्र चीन के प्रख्यात जर्नल एक्टा इकोलॉजी सिनिका में प्रकाशित किया गया है। राजेंद्र वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधार्थी छात्र हैं।
राजेंद्र की इंटरमीडिएट तक कि शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज चौमेल में हुई है, जबकि बीएससी लोहाघाट डिग्री कॉलेज और एमएससी नैनीताल महाविद्यालय से हुई है। राजेंद्र ने गोविंद बल्लभ पंत संस्थान अल्मोड़ा और पूर्वोत्तर राज्यों के वनों में अपना शोध कार्य किया है। राजेंद्र के शोध का मुख्य विषय भारत के सामयिक शुष्क पर्णपाती वनों में बायोमास, कार्बन घनत्व और वृक्ष प्रजातियों की विविधता पर केंद्रित है। इस शोध में उनके साथ शालनी ध्यानी ने भी कार्य किया है।
बचपन से प्रकृति की तरफ रहा है रुझान
शोधार्थी राजेंद्र जोशी का कहना है कि पहाड़ से ताल्लुक होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान प्रकृति की तरफ रहा। इस ही के परिणामस्वरूप उन्होंने पेड़-पौधों और वनों को अपने शोध का विषय चुना है।
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राजेंद्र की इंटरमीडिएट तक कि शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज चौमेल में हुई है, जबकि बीएससी लोहाघाट डिग्री कॉलेज और एमएससी नैनीताल महाविद्यालय से हुई है। राजेंद्र ने गोविंद बल्लभ पंत संस्थान अल्मोड़ा और पूर्वोत्तर राज्यों के वनों में अपना शोध कार्य किया है। राजेंद्र के शोध का मुख्य विषय भारत के सामयिक शुष्क पर्णपाती वनों में बायोमास, कार्बन घनत्व और वृक्ष प्रजातियों की विविधता पर केंद्रित है। इस शोध में उनके साथ शालनी ध्यानी ने भी कार्य किया है।
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बचपन से प्रकृति की तरफ रहा है रुझान
शोधार्थी राजेंद्र जोशी का कहना है कि पहाड़ से ताल्लुक होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान प्रकृति की तरफ रहा। इस ही के परिणामस्वरूप उन्होंने पेड़-पौधों और वनों को अपने शोध का विषय चुना है।
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