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दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं देवदार के पेड़
अमर उजाला ब्यूराे लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:56 PM IST
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लोहाघाट के डिग्रीकॉलेज रोड़ में खतरनाक स्थित में खड़े देवदार के वृक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
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डिग्री कॉलेज मार्ग के ऊपर आड़े तिरछे लटके देवदार के पेड़ दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। दो दिन पूर्व भी इस मार्ग में देवदार का पेड़ गिरने के कारण एक छात्रा चोटिल हो चुकी है। देवदार पेड़ों की जड़ें खोखली और जड़ों में से मिट्टी हटने के कारण पेड़ खतरनाक स्थिति में खड़े हैं।
छात्रों ने वन विभाग पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए खतरनाक स्थिति में खड़े पेड़ों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग उठाई है। पेड़ों का शीघ्र निस्तारण न किए जाने पर उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। छात्र संघ अध्यक्ष विवेक पुजारी, पूर्व छात्र संघ सचिव इंदर ढेक, पंकज पुजारी, संदीप बगौली, रोबिन मेहता, दीपक फर्त्याल, अंकुर माहरा, अमित मेहता, राहुल जोशी आदि का कहना है कि इस मार्ग से पीजी कॉलेज के छात्र छात्राओं के अलावा रायनगर चौड़ी, डैंसली, भुमलाई, कोयाटी, गल्लागांव, गंगनौला आदि स्थानों के लोगों के अलावा दिन भर वाहनों का आना जाना लगा रहता है।
बाड़ीगाढ़ पुल से लेकर कॉलेज तक करीब 12 से अधिक पेड़ खतरनाक स्थिति में लटके पड़े हैं। जिससे वह किसी भी समय गिरकर लोगों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। छात्रों का कहना है कि इसी मार्ग में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी, लोहाघाट व काली कुमाऊं रेंज कार्यालय होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं गया।
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छात्रों ने वन विभाग पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए खतरनाक स्थिति में खड़े पेड़ों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग उठाई है। पेड़ों का शीघ्र निस्तारण न किए जाने पर उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। छात्र संघ अध्यक्ष विवेक पुजारी, पूर्व छात्र संघ सचिव इंदर ढेक, पंकज पुजारी, संदीप बगौली, रोबिन मेहता, दीपक फर्त्याल, अंकुर माहरा, अमित मेहता, राहुल जोशी आदि का कहना है कि इस मार्ग से पीजी कॉलेज के छात्र छात्राओं के अलावा रायनगर चौड़ी, डैंसली, भुमलाई, कोयाटी, गल्लागांव, गंगनौला आदि स्थानों के लोगों के अलावा दिन भर वाहनों का आना जाना लगा रहता है।
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बाड़ीगाढ़ पुल से लेकर कॉलेज तक करीब 12 से अधिक पेड़ खतरनाक स्थिति में लटके पड़े हैं। जिससे वह किसी भी समय गिरकर लोगों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। छात्रों का कहना है कि इसी मार्ग में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी, लोहाघाट व काली कुमाऊं रेंज कार्यालय होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं गया।
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