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Champawat News: वीर चक्र विजेता कैप्टन करम सामंत का निधन
Wed, 10 May 2023 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 10 May 2023 11:31 PM IST
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वीरचक्र विजेता करम सिंह सामंत। (फाइल फोटो)
लोहाघाट/चंपावत। वीर चक्र विजेता कैप्टन (सेवानिवृत्त) करम सिंह सामंत का सोमवार को निधन हो गया। वे 100 वर्ष के थे। पंचेश्वर घाट पर मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके पूर्व सैनिक बेटे लक्ष्मण सिंह सामंत ने चिता को मुखाग्नि दी लेकिन समय पर सूचना न मिलने के कारण सैन्य सम्मान से अंतिम विदाई नहीं दी जा सकी। आठ कुमाऊं पिथौरागढ़ के कमांडिंग अफसर कर्नल कृष्णा थापा और नायब सूबेदार प्रकाश चंद्र शर्मा ने लोहाघाट स्थित उनके आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कैप्टन सामंत ने मैनईटर्स बटालियन की ओर से अक्तूबर 1947 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में बड़गाम जम्मू कश्मीर में असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया था। इस बहादुरी के लिए उन्हें वर्ष 1950 में वीर चक्र के सम्मान से नवाजा गया। मूल रूप से लोहाघाट ब्लॉक के निडिल गांव में पहली नवंबर 1923 को जन्मे कैप्टन सामंत ने नवंबर 1942 में सेना में शामिल हुए थे। नवंबर 1970 तक सेना में सेवा दी।
सेवानिवृत्ति के बाद 53 साल तक समाज को जगाते रहे
लोहाघाट (चंपावत)। सेवानिवृत्त कैप्टन करम सिंह सामंत जिंदगी के शतक के एकदम करीब थे। इस साल पहली नवंबर को वे 100 साल पूरा करते लेकिन आठ मई की रात उनका निधन हो गया। वह अपनी जिंदगी में भी बहादुरी और जिंदादिल था। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ होने के बावजूद आखिरी सांस तक योद्धा की जिंदगी जिए। वर्ष 1970 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद समाज को जगाने का काम जारी रखा।
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नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र के निडिल गांव के करम सिंह सामंत 19 साल की उम्र में वर्ष 1942 में सेना में भर्ती हुए। उन्होंने 28 साल तक देश की सेवा की। इस दौरान नवंबर 1947 में बड़गाम में हुए युद्ध में उन्होंने शौर्य का प्रदर्शन किया। 16 कुमाऊं मैनईटर्स बटालियन के अधिकारियों ने कई बार उनके आवास पर पहुंच कर उनकी कुशलक्षेम लेती रहती थी। अग्निशमन यूनिट टनकपुर में तैनात उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह सामंत और भतीजे हेमंत सिंह सामंत ने बताया कि नवंबर 2019 में बटालियन के अफसरों ने आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया।
विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय, पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता, पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष कैप्टन आरएस देव, कैप्टन पीएस देव, कैप्टन रघुवीर सिंह, हवलदार हेमंत राय, हयात सिंह आदि ने उनके निधन पर शोक जताया है।
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कैप्टन सामंत ने मैनईटर्स बटालियन की ओर से अक्तूबर 1947 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में बड़गाम जम्मू कश्मीर में असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया था। इस बहादुरी के लिए उन्हें वर्ष 1950 में वीर चक्र के सम्मान से नवाजा गया। मूल रूप से लोहाघाट ब्लॉक के निडिल गांव में पहली नवंबर 1923 को जन्मे कैप्टन सामंत ने नवंबर 1942 में सेना में शामिल हुए थे। नवंबर 1970 तक सेना में सेवा दी।
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सेवानिवृत्ति के बाद 53 साल तक समाज को जगाते रहे
लोहाघाट (चंपावत)। सेवानिवृत्त कैप्टन करम सिंह सामंत जिंदगी के शतक के एकदम करीब थे। इस साल पहली नवंबर को वे 100 साल पूरा करते लेकिन आठ मई की रात उनका निधन हो गया। वह अपनी जिंदगी में भी बहादुरी और जिंदादिल था। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ होने के बावजूद आखिरी सांस तक योद्धा की जिंदगी जिए। वर्ष 1970 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद समाज को जगाने का काम जारी रखा।
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नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र के निडिल गांव के करम सिंह सामंत 19 साल की उम्र में वर्ष 1942 में सेना में भर्ती हुए। उन्होंने 28 साल तक देश की सेवा की। इस दौरान नवंबर 1947 में बड़गाम में हुए युद्ध में उन्होंने शौर्य का प्रदर्शन किया। 16 कुमाऊं मैनईटर्स बटालियन के अधिकारियों ने कई बार उनके आवास पर पहुंच कर उनकी कुशलक्षेम लेती रहती थी। अग्निशमन यूनिट टनकपुर में तैनात उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह सामंत और भतीजे हेमंत सिंह सामंत ने बताया कि नवंबर 2019 में बटालियन के अफसरों ने आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया।
विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय, पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता, पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष कैप्टन आरएस देव, कैप्टन पीएस देव, कैप्टन रघुवीर सिंह, हवलदार हेमंत राय, हयात सिंह आदि ने उनके निधन पर शोक जताया है।