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शिक्षा पर खर्च हो अधिक पैसा
ब्यूरो/अमर उजाला,चंपावत
Updated Fri, 19 Feb 2016 10:58 PM IST
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भविष्य को सुनहरा करने के लिए वर्तमान पर तवज्जो जरूरी है। इसके लिए पढ़ाई पर सरकार खर्च करने में कोताही न बरते। ये कहना है आम छात्रों का। वह चाहते हैं कि आगामी केंद्रीय बजट में शिक्षा पर बजट बढ़ाया जाए, पढ़ाई गरीब की पहुंच में भी हो और दूरदराज के नौजवान भी शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल हो सके।
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रियायती दरों पर उपलब्ध हों पुस्तकें
पीजी कॉलेज में स्नातक की छात्रा बबीता पांडेय का कहना है कि बजट में विद्यार्थियों के हितों पर पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। पाठ्यक्रम के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें रियायती दर पर उपलब्ध हों।
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दूरदराज के स्कूलों के लिए हो खास प्रावधान
पीजी कॉलेज की दीपा जोशी का कहना है कि दूरदराज में उच्च शिक्षा के केंद्र ठीक हाल में नहीं है। उनके बुनियादी ढांचे को सशक्त करने को कदम उठाया जाए। शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से तैनाती की जाए।
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सुधारी जाए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता
मीनाक्षी विश्वकर्मा का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र की उच्च शिक्षा गुणवत्ता में बेहद पीछे है। इसे सुधारा जाना चाहिए। हर स्कूल में उम्दा पुस्तकों वाला पुस्तकालय और अन्य सुविधाएं हों।
सस्ती हो तकनीकी शिक्षा
पॉलीटेक्निक के छात्र सचिन पंगरिया मानते हैं कि बजट में रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पहाड़ में रोजगार के कम अवसरों को देखते हुए तकनीकी शिक्षा को गुणवत्ता के साथ सस्ता करा जाएं।
प्रतिभाओं के लिए हो अवसर
भुवन पटवा का कहना है कि निर्धन मेधावी छात्रों के लिए पढ़ाई के आगे के अवसर बढ़ें। इसके लिए शैक्षिक कर्ज लंबी अवधि के लिए मिले और ब्याज दर भी कम हो।