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विकास की दौड़ में पिछड़ा बाराकोट विकासखंड
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लोहाघाट (चंपावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर जहां चंपावत जिले को मॉडल जिला बनाने की कवायद तेजी से चल रही है वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ रहा बाराकोट ब्लाक विकास की रेस में काफी पिछड़ा हुआ है। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में सड़क सुविधा न होने से ग्रामीण कई किलोमीटर पैदल सफर करने को मजबूर है। लोहाघाट ब्लाक में एक, पाटी में दो और चंपावत में तीन डिग्री कॉलेज हैं तो वहीं बाराकोट ब्लाक में एक भी डिग्री कॉलेज न होने से यहां के छात्र-छात्राओं को उच्चशिक्षा के लिए बाहरी स्थानों की दौड़ लगानी पड़ रही है। युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए खुला आईटीआई भी वर्षों पहले बंद हो चुका है।
ब्लाक के लोगों के लिए पेयजल योजनाएं तक अब तक नहीं बन पाई। यहां के लोग छोटी -छोटी पेयजल योजनाओं के भरोसे हैं, उसमें भी लाइनों में टूटफूट होने से लंबे समय तक उसकी मरम्मत नहीं हो पाती है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात है और न ही एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की ही सुविधा मिल पाती है। तहसील में एसडीएम का पद सृजित नहीं होने के कारण भी क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्थाई तहसीलदार तक की तैनाती नहीं हो सकी है।
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बाराकोट ब्लाक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ रहा है। राज्य गठन के 22 साल हो गए हैं लेकिन यहां के विकास के लिए न तो जन प्रतिनिधियों ने कोई ध्यान दिया और न ही शासन प्रशासन की ओर से ही कोई कार्य किए गए।
नंदाबल्लभ बगौली, ज्येष्ठ प्रमुख, बाराकोट
बाराकोट ब्लाक विकास की दौड़ में जिले में सबसे पीछे है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी हैं। स्थानीय जन प्रतिनिधियों से लेकर शासन प्रशासन तक आवाज उठाई गई लेकिन यहां के विकास के लिए कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पा रही है।
प्रहलाद सिंह अधिकारी, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष, बाराकोट
बाराकोट ब्लाक में डिग्री कॉलेज, खेल मैदान, बंद पड़े आईटीआई का पुन: संचालन, विद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के साथ यहां के पीएचसी का उच्चीकरण करने की दिशा में कार्य होना चाहिए। ब्लाक क्षेत्र की समस्याएं दूर होनी चाहिए।
हरीश लाल वर्मा, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष, बाराकोट
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गांवों में सड़क सुविधा न होने से ग्रामीण कई किलोमीटर पैदल सफर करने को मजबूर है। लोहाघाट ब्लाक में एक, पाटी में दो और चंपावत में तीन डिग्री कॉलेज हैं तो वहीं बाराकोट ब्लाक में एक भी डिग्री कॉलेज न होने से यहां के छात्र-छात्राओं को उच्चशिक्षा के लिए बाहरी स्थानों की दौड़ लगानी पड़ रही है। युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए खुला आईटीआई भी वर्षों पहले बंद हो चुका है।
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ब्लाक के लोगों के लिए पेयजल योजनाएं तक अब तक नहीं बन पाई। यहां के लोग छोटी -छोटी पेयजल योजनाओं के भरोसे हैं, उसमें भी लाइनों में टूटफूट होने से लंबे समय तक उसकी मरम्मत नहीं हो पाती है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात है और न ही एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की ही सुविधा मिल पाती है। तहसील में एसडीएम का पद सृजित नहीं होने के कारण भी क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्थाई तहसीलदार तक की तैनाती नहीं हो सकी है।
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बाराकोट ब्लाक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ रहा है। राज्य गठन के 22 साल हो गए हैं लेकिन यहां के विकास के लिए न तो जन प्रतिनिधियों ने कोई ध्यान दिया और न ही शासन प्रशासन की ओर से ही कोई कार्य किए गए।
नंदाबल्लभ बगौली, ज्येष्ठ प्रमुख, बाराकोट
बाराकोट ब्लाक विकास की दौड़ में जिले में सबसे पीछे है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी हैं। स्थानीय जन प्रतिनिधियों से लेकर शासन प्रशासन तक आवाज उठाई गई लेकिन यहां के विकास के लिए कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पा रही है।
प्रहलाद सिंह अधिकारी, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष, बाराकोट
बाराकोट ब्लाक में डिग्री कॉलेज, खेल मैदान, बंद पड़े आईटीआई का पुन: संचालन, विद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के साथ यहां के पीएचसी का उच्चीकरण करने की दिशा में कार्य होना चाहिए। ब्लाक क्षेत्र की समस्याएं दूर होनी चाहिए।
हरीश लाल वर्मा, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष, बाराकोट