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Champawat News: बकोड़ाः परिवहन सुविधा के नाम पर घोड़ा-खच्चर

Tue, 21 Nov 2023 10:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 21 Nov 2023 10:27 PM IST
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Bakora: Horse-mule in the name of transportation facility
तल्लादेश के बकोड़ा आदि गांवों में घोड़े-खच्चर है आवाजाही का जरिया। संवाद
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के बकोड़ा और आसपास के गांव के बुजुर्ग आज तक रेल, बस तो दूर साइकिल तक की सवारी नहीं कर पाए हैं। सड़क विहीन इलाका होने से कई ग्रामीण पलायन कर गए हैं। ग्रामीणों के जीविकोपार्जन के लिए सामग्री ढोने का काम घोड़े और खच्चरों से लिया जाता है। खच्चर स्वामी अर्जुन सिंह, चंचल सिंह, तेज सिंह ग्रामीणों की मांग पर उनकी जरूरत का सामान इन जानवरों पर ढोते हैं। किसी व्यक्ति के बीमार होने पर भी अस्पताल लाने के लिए इन्हीं खच्चरों का सहारा लिया जाता है।
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सोमवार को गांव पहुंचे डीएम नवनीत पांडे ने भी ग्रामीणों की इस पीड़ा को देखा। सड़क नहीं होने से विकास से कटे इन इलाकों के लोगों का कोई भी सामान 40 से 50 अधिक दाम पर पहुंचता है। यहां खाने-पीने का सामान ही नहीं भवन सामग्री की लागत भी प्रति क्विंटल 550 रुपये बढ़ गई है। भाड़े की वजह से बकोड़ा में सीमेंट के दाम 60 प्रतिशत अधिक हो जाते हैं। सड़क न होने से मरीज को मंच तक लाने में चार घंटे से अधिक समय लगता है। संवाद
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घरेलू सामग्री की कीमतें
सामग्री: मंच की कीमत बकोड़ा की कीमत (प्रति किग्रा.रुपये में)
नमक 11 16
गुड़ 40 55
आटा 26 32
चावल 47 60
मंच-बकोड़ा सड़क से जुड़ने वाले 17 गांव
पनतौला, खुलकना, ग्वानी, मरथपला, स्यूतौला, बसेड़ी, खटगरी, सूना गांव, मटकांडा, बकरौला, डांडा, बकोड़ा, मथार, अकरी, मोष्टी, बांस और मोस्टा।
बाक्स
वन अनापत्ति आ रही आड़े
चंपावत। 12 किमी लंबी मंच-बकोड़ा सड़क 2012 में मंजूर हुई थी लेकिन आज तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। कम आबादी वाले इन गांवों के लिए सड़क बनने में हो रही देरी की वजह घना जंगल है। लोनिवि के अपर सहायक अभियंता नरेंद्र सिंह का कहना है कि वनभूमि आपत्तियों को दूर करने के लिए संशोधित पत्रावली वन विभाग को भेजी गई है। इनके निराकरण के बाद ही सड़क निर्माण हो सकेगा।
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सड़क नहीं होने के नुकसान
- विकास में पिछड़ापन, जूनियर हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई के लिए 12 किमी दूर मंच आने की मजबूरी, स्वास्थ्य केंद्र नहीं, इलाज के लिए डोली के सहारे मंच और फिर चंपावत जिला अस्पताल लाना बेबसी, सड़क से गांव तक सामान की लागत 40 से 50 प्रतिशत अधिक

कोट
बकोड़ा अति दुर्गम क्षेत्र है। यहां सड़क शीर्ष प्राथमिकता है। मंच-बकोड़ा सड़क पर वन आपत्तियों का निस्तारण कर प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा सौराई की लिंक सड़क से बकोड़ा को जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है। बकोड़ा को चूका, सीम से जोड़ने के लिए पुराने अश्व मार्ग को हल्का वाहन मार्ग के रूप में बदलने पर भी विचार किया जा रहा है।
नवनीत पांडे, डीएम, चंपावत।
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