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विश्व रेबीज दिवस:चंपावत जिले में अगस्त से कहीं नहीं है एआरवी
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सरकारी अस्पतालों में इलाज तो लगातार महंगा हो रहा है लेकिन जरूरी सुविधाएं नदारद हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का जिले में टोटा है। बीते दो महीनों से जिले के किसी भी अस्पताल में एआरवी नहीं है। लोग मेडिकल स्टोरों से महंगे वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं।
चंपावत जिले में हर साल करीब 2100 बॉयल की जरूरत होती है लेकिन इस वक्त किसी भी सरकारी अस्पताल में वैक्सीन नहीं है। टनकपुर में पांच माह, लोहाघाट में दो माह से एआरवी नहीं है। इस वजह से कुत्ते के काटने पर लोगों को परेशानी हो रही है। 2019 से अब तक जिले में कुत्तों के काटने की 401 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से 249 लोगों को एआरवी के लिए मेडिकल स्टोरों की शरण में जाना पड़ा। इसके चलते 4.35 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
टनकपुर संयुक्त अस्पताल में इस साल मई से एआरवी नहीं है। एमएस एचएस पांगती का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक और जिलाधिकारी को सूचित किया है। बीते करीब पांच महीनों में 39 लोगों को मेडिकल स्टोर से एआरवी खरीदनी पड़ीं। इलाज में तीन से पांच इंजेक्शन का कोर्स है जिसमें 1050 से 1750 रुपये का खर्च है। वहीं लोहाघाट के एमएस मंजीत सिंह का कहना है कि पांच अगस्त से एआरवी नहीं है। इस दौरान 31 लोग कुत्ते काटे के आए।
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मुख्य चिकित्साधिकारी आरपी खंडूरी का कहना है कि एआरवी के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। जल्द ही एआरवी की व्यवस्था के लिए खरीद की जा रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
पांच माह में 562 लोगों को लगे रेबीज के टीक
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आवारा जानवरों से लोग परेशान हैं। कुत्ते, बंदर, सांप आदि से काटे जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में अप्रैल से अगस्त तक विभिन्न प्रजातियों के जानवरों से काटे जाने वाले 618 पीड़ितों का उपचार किया गया। पिछले चार माह में 32 लोगों को सांप ने काटा।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच माह में 562 लोगों को रेबीज के टीके लगाए। अस्पताल में विभिन्न जानवरों के काटे 618 लोगों का उपचार किया गया। इनमें से 56 लोग ऐसे थे जो बंदर, सुअर, सांप, बिल्ली के काटने से पीड़ित थे। गर्मी के सीजन में मुवानी और अन्य घाटी वाले क्षेत्रों में सांप के काटे जाने की घटनाएं काफी हुई।
मई में दो, जून में पांच, जुलाई में सात और अगस्त में 18 लोगों को सांप ने काटा। जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.निर्मला पुनेठा का कहना है कि जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कुत्तों के काटने के बाद जो भी मरीज आते हैं उन्हें अस्पताल से ही टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।
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चंपावत जिले में हर साल करीब 2100 बॉयल की जरूरत होती है लेकिन इस वक्त किसी भी सरकारी अस्पताल में वैक्सीन नहीं है। टनकपुर में पांच माह, लोहाघाट में दो माह से एआरवी नहीं है। इस वजह से कुत्ते के काटने पर लोगों को परेशानी हो रही है। 2019 से अब तक जिले में कुत्तों के काटने की 401 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से 249 लोगों को एआरवी के लिए मेडिकल स्टोरों की शरण में जाना पड़ा। इसके चलते 4.35 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
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टनकपुर संयुक्त अस्पताल में इस साल मई से एआरवी नहीं है। एमएस एचएस पांगती का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक और जिलाधिकारी को सूचित किया है। बीते करीब पांच महीनों में 39 लोगों को मेडिकल स्टोर से एआरवी खरीदनी पड़ीं। इलाज में तीन से पांच इंजेक्शन का कोर्स है जिसमें 1050 से 1750 रुपये का खर्च है। वहीं लोहाघाट के एमएस मंजीत सिंह का कहना है कि पांच अगस्त से एआरवी नहीं है। इस दौरान 31 लोग कुत्ते काटे के आए।
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मुख्य चिकित्साधिकारी आरपी खंडूरी का कहना है कि एआरवी के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। जल्द ही एआरवी की व्यवस्था के लिए खरीद की जा रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
पांच माह में 562 लोगों को लगे रेबीज के टीक
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आवारा जानवरों से लोग परेशान हैं। कुत्ते, बंदर, सांप आदि से काटे जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में अप्रैल से अगस्त तक विभिन्न प्रजातियों के जानवरों से काटे जाने वाले 618 पीड़ितों का उपचार किया गया। पिछले चार माह में 32 लोगों को सांप ने काटा।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच माह में 562 लोगों को रेबीज के टीके लगाए। अस्पताल में विभिन्न जानवरों के काटे 618 लोगों का उपचार किया गया। इनमें से 56 लोग ऐसे थे जो बंदर, सुअर, सांप, बिल्ली के काटने से पीड़ित थे। गर्मी के सीजन में मुवानी और अन्य घाटी वाले क्षेत्रों में सांप के काटे जाने की घटनाएं काफी हुई।
मई में दो, जून में पांच, जुलाई में सात और अगस्त में 18 लोगों को सांप ने काटा। जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.निर्मला पुनेठा का कहना है कि जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कुत्तों के काटने के बाद जो भी मरीज आते हैं उन्हें अस्पताल से ही टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।