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जिला अस्पताल में नहीं लग रहा एंटी रेबीज वैक्सीन
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Tue, 30 May 2017 10:27 PM IST
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जिला अस्पताल में कुत्ते अथवा बंदर के काटने पर लगाई जाने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिलने से पीड़ितों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को अमोड़ी क्षेत्र से आए ग्रामीण के बच्चे को अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिल पाई। जिस पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने रोष व्यक्त किया है ।
मंगलवार को अमोड़ी निवासी संदीप भट्ट पुत्र दुर्गादत्त को कुत्ते ने काट लिया। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने ओपीडी में प्राथमिक उपचार के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने की सलाह दी। लेकिन पीड़ित के परिजनों को अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिल पाई। जिस कारण उन्हें बाहर से वैक्सीन की व्यवस्था करनी पड़ी। अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन न होने की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भड़क गए हैं। जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर भट्ट, बीडीसी सदस्या जीवंती देवी आदि ने अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि दूरदराज से बड़ी आशा के साथ जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को वैक्सीन के लिए टरकाया जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
रेबीज वैक्सीन लगाने के अलग नियम हैं: सीएमएस
चंपावत। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के नियम अलग हैं, जिसके लिए डाक्टरों को निर्देशित किया गया है। नियम यह है कि पीड़ित को किस प्रकार के जानवर ने काटा है, इसका परीक्षण किया जाता है। यदि पालतू कुत्ते ने काटा है तो पीड़ित को टिटनेस लगेगा तथा दस दिनों तक काटने वाले कुत्ते पर नजर रखनी होती है। उसके बाद ही एंटी रेबीज वैक्सीन दी जाती है। अस्पताल में एंटी रेबीज उपलब्ध है, लेकिन यह पीड़ित की मर्जी से लगने वाली वैक्सीन नहीं है।
मंगलवार को अमोड़ी निवासी संदीप भट्ट पुत्र दुर्गादत्त को कुत्ते ने काट लिया। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने ओपीडी में प्राथमिक उपचार के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने की सलाह दी। लेकिन पीड़ित के परिजनों को अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिल पाई। जिस कारण उन्हें बाहर से वैक्सीन की व्यवस्था करनी पड़ी। अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन न होने की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भड़क गए हैं। जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर भट्ट, बीडीसी सदस्या जीवंती देवी आदि ने अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि दूरदराज से बड़ी आशा के साथ जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को वैक्सीन के लिए टरकाया जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
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रेबीज वैक्सीन लगाने के अलग नियम हैं: सीएमएस
चंपावत। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के नियम अलग हैं, जिसके लिए डाक्टरों को निर्देशित किया गया है। नियम यह है कि पीड़ित को किस प्रकार के जानवर ने काटा है, इसका परीक्षण किया जाता है। यदि पालतू कुत्ते ने काटा है तो पीड़ित को टिटनेस लगेगा तथा दस दिनों तक काटने वाले कुत्ते पर नजर रखनी होती है। उसके बाद ही एंटी रेबीज वैक्सीन दी जाती है। अस्पताल में एंटी रेबीज उपलब्ध है, लेकिन यह पीड़ित की मर्जी से लगने वाली वैक्सीन नहीं है।
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