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पशुओं पर भी पड़ रही लॉकडाउन की मार
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चंपावत/लोहाघाट। कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के खतरों के बीच जिले के दूरदराज क्षेत्रों के पशुओं और पशुपालकों की भी मुसीबत बढ़ रही है। लधिया, तल्लापाल, गुमदेश व तल्लादेश आदि क्षेत्रों के मवेशी न केवल टीकाकरण से वंचित हो रहे हैं, बल्कि इलाज की जरूरत होने पर भी मुश्किल आ रही है। इसके अलावा पशुपालकों को सबसे बड़ी परेशानी पशु चारे की हो रही है। पशुपालन विभाग का चारा कम जगह लेने के साथ ही पौष्टिक व किफायती भी होता है।
चंपावत जिले में करीब 1.39 लाख लोग पशुपालक हैं। लॉकडाउन के चलते पशुपालकों को पशुपालन विभाग से मिलने वाला चारा नहीं मिल पा रहा है। जिससे वह परेशान हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके चंद बताते हैं कि इमरजेंसी में पशुओं का इलाज होने के साथ ही ऑनकाल विभागीय टीमें पशुपालकों के घरों को भी जा रही है।
सीवीओ डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि चंपावत जिले में 24 किलो के 2100 पैकेट पशु चारा की मांग की गई है। चारा अभी नहीं आया है। आते ही वितरित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पशुओं का इमरजेंसी उपचार चल रहा है। ब्यूरो
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चंपावत जिले में करीब 1.39 लाख लोग पशुपालक हैं। लॉकडाउन के चलते पशुपालकों को पशुपालन विभाग से मिलने वाला चारा नहीं मिल पा रहा है। जिससे वह परेशान हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके चंद बताते हैं कि इमरजेंसी में पशुओं का इलाज होने के साथ ही ऑनकाल विभागीय टीमें पशुपालकों के घरों को भी जा रही है।
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सीवीओ डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि चंपावत जिले में 24 किलो के 2100 पैकेट पशु चारा की मांग की गई है। चारा अभी नहीं आया है। आते ही वितरित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पशुओं का इमरजेंसी उपचार चल रहा है। ब्यूरो
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