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पशु सेवा केंद्रों में ताला, पशुपालक बेहाल
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लंबे समय से बंद तल्लादेश क्षेत्र का पशु सेवा केंद्र। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के तामली और मंच गांव के पशु सेवा केंद्रों का ताला नहीं खुल पा रहा है। लंबे समय से इन केंद्रों के बंद होने से लोगों को मवेशियों के इलाज के लिए मोटी रकम खर्च कर चंपावत की दौड़ लगानी पड़ रही है।
तीन महीने के अंतराल में हेमा देवी, बहादुर सिंह, राहुल सिंह, दिलीप सिंह की दुधारू गायों की तबियत बिगड़ी तो उन्हें इलाज के लिए तामली से 52 किमी दूर चंपावत लाना पड़ा। इलाज के लिए चंपावत लाने और ले जाने पर 1500 रुपये का खर्च आ गया। ये नौबत तामली और मंच दोनों जगह पशु सेवा केंद्र होने के बावजूद है। पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं होने से दोनों केंद्रों में ताले लटके हैं। ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह, दीपक महर, राहुल महर आदि ग्रामीणों ने अविलंब कार्मिकों की तैनाती करने की मांग की है। इधर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी का कहना है कि जिले के 22 पशु सेवा केंद्रों में से 11 में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। इन पदों को भरने के लिए पत्र भेजा गया है।
गांवों के लिए महत्वपूर्ण हैं पशुधन प्रसार अधिकारी
चंपावत। पशुधन प्रसार अधिकारियों की गांवों में मवेशियों की देखरेख में खासी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान के अलावा विभागीय योजनाओं की जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाने में कठिनाई आ रही है।
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पशुधन प्रसार अधिकारी के बगैर हैं चंपावत जिले के 12 केंद्र:
तामली, मंच, खतेड़ा, रौसाल, बसेड़ी, रैघांव, देवीधुरा, जोश्यूड़ा, भिंगराड़ा, सूखीढांग, ऊचौलीगोठ पशु सेवा केंद्र और पशु प्रजनन प्रक्षेत्र नरियालगांव।
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तीन महीने के अंतराल में हेमा देवी, बहादुर सिंह, राहुल सिंह, दिलीप सिंह की दुधारू गायों की तबियत बिगड़ी तो उन्हें इलाज के लिए तामली से 52 किमी दूर चंपावत लाना पड़ा। इलाज के लिए चंपावत लाने और ले जाने पर 1500 रुपये का खर्च आ गया। ये नौबत तामली और मंच दोनों जगह पशु सेवा केंद्र होने के बावजूद है। पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं होने से दोनों केंद्रों में ताले लटके हैं। ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह, दीपक महर, राहुल महर आदि ग्रामीणों ने अविलंब कार्मिकों की तैनाती करने की मांग की है। इधर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी का कहना है कि जिले के 22 पशु सेवा केंद्रों में से 11 में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। इन पदों को भरने के लिए पत्र भेजा गया है।
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गांवों के लिए महत्वपूर्ण हैं पशुधन प्रसार अधिकारी
चंपावत। पशुधन प्रसार अधिकारियों की गांवों में मवेशियों की देखरेख में खासी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान के अलावा विभागीय योजनाओं की जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाने में कठिनाई आ रही है।
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पशुधन प्रसार अधिकारी के बगैर हैं चंपावत जिले के 12 केंद्र:
तामली, मंच, खतेड़ा, रौसाल, बसेड़ी, रैघांव, देवीधुरा, जोश्यूड़ा, भिंगराड़ा, सूखीढांग, ऊचौलीगोठ पशु सेवा केंद्र और पशु प्रजनन प्रक्षेत्र नरियालगांव।