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चंपावत में लोकप्रिय होगी अखरोट की खेती!
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चंपावत की नर्सरी में स्थित पॉलीहाउस।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले में अखरोट की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहल शुरू की गई है। इसके लिए उद्यान विभाग ने तीन पौधालयों में अखरोट की पौध लगाने का निर्णय लिया है। इसमें उत्पादित पौधों का उपयोग अखरोट की खेती के लिए किया जाएगा।
जिले में उद्यान विभाग के छह राजकीय पौधालय मुड़ियानी, चंपावत, गोशनी, खतेड़ा, पाटन और दिगालीचौड़ में हैं। करीब 33 हेक्टेयर में फैली जिले की छह नर्सरियों में से तीन चंपावत, मुड़ियानी और पाटन में अखरोट के पौधों की नर्सरी बनाई जा रही है। ताकि अखरोट के पौधों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हो सके। ऐसा करने से अखरोट की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि पौधशालाओं में तैयार अखरोट के इन पौधों को किसानों को बांटा जाएगा। जिले में अभी 281 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अखरोट की खेती होती है। इसमें 64 एमटी पैदावार हो रही है। इस नई पहल से अखरोट की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
जायका परियोजना से भी दिया जा रहा बढ़ावा
चंपावत। उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन और जायका परियोजना के तहत वन विभाग चंपावत जिले की दस वन पंचायतों में अखरोट की खेती को प्रोत्साहित करेगा। लोहाघाट, भिंगराड़ा, देवीधुरा क्षेत्र में दिसंबर 2019 में अखरोट के 10050 पौधे लगाए गए। लोहाघाट के ठांटा, फोर्ती, लोजनी, मंगलोली, रौसाल, देवीधुरा के वारी, कटना, भिंगराड़ा रेंज के भिंगराड़ा, खेताल नरियाल, बिरगुल वन पंचायतों में अखरोट की खेती कराई जा रही है।
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अखरोट के 2820 पौध मिले
चंपावत। जिले को इस साल के लिए अखरोट के 2820 पौध और बीज मिल गए हैं। इन पौधों को किसानों को दिया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि बागवानी मिशन के तहत 820 कलमी पौध दूनागिरि, गंगोलीहाट, भट्यूड़ा और विषाड़ से मिले हैं। इसी तरह विभागीय योजना के तहत बीज और कलमी अखरोट के रूप में दो हजार पौधे दिए गए हैं।
अखरोट के सेवन के ये हैं लाभ
अखरोट में कई तरह के औषधीय गुण हैं। इसके सेवन से दिमाग की मजबूती समेत कई लाभ हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है। इसका सेवन हड्डियों की मजबूती से लेकर रक्तचाप नियंत्रण, वजन कम करने सहित कई परेशानियों से राहत दिलाता है।
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जिले में उद्यान विभाग के छह राजकीय पौधालय मुड़ियानी, चंपावत, गोशनी, खतेड़ा, पाटन और दिगालीचौड़ में हैं। करीब 33 हेक्टेयर में फैली जिले की छह नर्सरियों में से तीन चंपावत, मुड़ियानी और पाटन में अखरोट के पौधों की नर्सरी बनाई जा रही है। ताकि अखरोट के पौधों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हो सके। ऐसा करने से अखरोट की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि पौधशालाओं में तैयार अखरोट के इन पौधों को किसानों को बांटा जाएगा। जिले में अभी 281 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अखरोट की खेती होती है। इसमें 64 एमटी पैदावार हो रही है। इस नई पहल से अखरोट की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
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जायका परियोजना से भी दिया जा रहा बढ़ावा
चंपावत। उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन और जायका परियोजना के तहत वन विभाग चंपावत जिले की दस वन पंचायतों में अखरोट की खेती को प्रोत्साहित करेगा। लोहाघाट, भिंगराड़ा, देवीधुरा क्षेत्र में दिसंबर 2019 में अखरोट के 10050 पौधे लगाए गए। लोहाघाट के ठांटा, फोर्ती, लोजनी, मंगलोली, रौसाल, देवीधुरा के वारी, कटना, भिंगराड़ा रेंज के भिंगराड़ा, खेताल नरियाल, बिरगुल वन पंचायतों में अखरोट की खेती कराई जा रही है।
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अखरोट के 2820 पौध मिले
चंपावत। जिले को इस साल के लिए अखरोट के 2820 पौध और बीज मिल गए हैं। इन पौधों को किसानों को दिया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि बागवानी मिशन के तहत 820 कलमी पौध दूनागिरि, गंगोलीहाट, भट्यूड़ा और विषाड़ से मिले हैं। इसी तरह विभागीय योजना के तहत बीज और कलमी अखरोट के रूप में दो हजार पौधे दिए गए हैं।
अखरोट के सेवन के ये हैं लाभ
अखरोट में कई तरह के औषधीय गुण हैं। इसके सेवन से दिमाग की मजबूती समेत कई लाभ हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है। इसका सेवन हड्डियों की मजबूती से लेकर रक्तचाप नियंत्रण, वजन कम करने सहित कई परेशानियों से राहत दिलाता है।