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कोरोना काल में किसानों पर मार : दोगुना हो गया कृषि बीमा प्रीमियम
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किसान पूरन सिंह रावत।
- फोटो : AMAR UJALA
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अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। चार चरणों के लॉकडाउन के बाद पहली जून से अनलॉक-वन शुरू हुआ, लेकिन इसके बावजूद अभी कृषि अर्थव्यस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। इसके उलट कृषि बीमा कराने वाले किसानों पर बोझ बढ़ गया है।
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पीएमएफबीवाई (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) के लिए खरीफ फसल की प्रीमियम की दर में बेतहाशा बढ़ोतरी की गई है। धान पर ये वृद्धि 100 फीसदी व मडुवे की प्रीमियम में 163 फीसदी का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी से किसानों की जेब पर भारी मार पड़ेगी।
मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि पीएमएफबीवाई में 2019 तक किसान को प्रति नाली धान में 10.11 रुपये व मडुवे में 8.06 रुपये प्रीमियम देनी होती थी। जिसे अब दो गुने से ज्यादा कर दिया गया है। पिछले साल 833 किसानों ने प्रीमियम के रूप में 93152.42 रुपये दिए थे। इतने ही क्षेत्रफल का इस खरीफ फसल में बीमा होने पर पर ये रकम दो लाख एक हजार से अधिक होगी।
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--::: किसान ऐसे कर सकेंगे आवेदन ::: बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के जिले के प्रतिनिधि के अलावा कृषि, उद्यान, सहकारिता, ग्राम्य विकास विभाग और बैंक में आवेदन जमा कर सकेंगे।
15 जुलाई तक होने वाले आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटो और भूमि के प्रमाणपत्र के लिए खतौनी की प्रति लगानी होगी।
वर्ष- फसल- प्रीमियम की दर (रुपये प्रति नाली) 2019- धान- 10.11 2020- धान- 20.22 2019- मडुवा- 8.06 2020- मडुवा- 21.23
---::: तीन साल तक नहीं मिला एक भी रुपये का मुआवजा :: चंद्रशेखर जोशी, चंपावत। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर जिले में किसानों की अमूमन जेब कट रही है। खरीफ की फसल में पहले तीन साल तक फसल को नुकसान होने के बावजूद एक भी किसान को मुआवजा नहीं मिला। अलबत्ता 2019 में 833 में से 109 किसानों को जरूर 83885 रुपये का मुआवजा मिला है। हर साल खेती को नुकसान से बचाने के लिए 2016 के खरीफ सीजन से पीएम फसल बीमा योजना लागू की गई थी। इस योजना में खरीफ फसल में धान और मडुवे को बीमित फसल की श्रेणी में रखा गया है। चंपावत जिले में करीब 7100 हेक्टेयर धान और 4847 हेक्टेयर में मड़ुवे की खेती होती है। खरीफ के चार सीजन में कुल 4538 किसानों ने 5.62 लाख रुपये की प्रीमियम देकर 1123.22 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया।
इनमें शुरू के तीन वर्षो (2016 से 2018 तक) में 3705 काश्तकारों ने 4.67 लाख रुपये प्रीमियम राशि दी, लेकिन एक को भी मुआवजा नहीं मिला। अलबत्ता 2019 की खरीफ फसल में 833 काश्तकारों में से 109 किसानों को मुआवजा मिला। पिछले साल कुल 93152 रुपये की प्रीमियम दी गई, जबकि 83885 रुपये का मुआवजा मिला। फसल के नुकसान का आकलन तहसील आधार पर किया जाता है। जिले में चंपावत व पूर्णागिरि तहसील, लोहाघाट तथा बाराकोट व पाटी तहसील को इकाईं बनाया गया है।
------::: इन आधारों पर मिलता है फसल बीमा का लाभ ::: 1. 75 प्रतिशत एरिया में बुआई न होने की स्थिति में बीमा धन की 25 प्रतिशत रकम। 2.बुआई के बाद मौसम की मार से 50 प्रतिशत नुकसान होने पर बीमा धन की 25 फीसदी राशि। 3.कटाई से पूर्व होने वाले नुकसान पर। 4.ओलावृष्टि, भूस्खलन या जलभराव जैसी स्थानीय आपदा से होने वाले नुकसान पर। 5.फसल की कटिंग के बाद खेत में फसल सूखाने के दौरान बारिश, चक्रवाल से होने वाले नुकसान की भरपाई।
---::: सरकार करे पुनर्विचार : "इस बार कोरोना में लॉकडाउन की वजह से पहले से ही किसान को अपनेे उत्पादों की बिक्री करने में दिक्कत आई है। ऐसे में बीमा की प्रीमियम राशि बढ़ाए जाने से किसानों पर ये अतिरिक्त बोझ बहुत भारी पड़ेगा। सरकार को दरों में पुनर्विचार करना चाहिए।"" -पूरन सिंह रावत, काश्तकार।
--:::: "पीएमएफबीवाई में राजस्व, कृषि विभाग के अलावा बीमा कंपनी की टीम के सर्वे के बाद किसान को बीमा की रकम दिए जाने का प्रावधान है। पहले तीन साल में नुकसान के सर्वे के बाद किसी भी किसानों को मुआवजे का पात्र नहीं पाया गया। अलबत्ता 2019 में खरीफ सीजन में 109 किसानों को बीमा कंपनी ने मुआवजा दिया है।" -राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी।
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मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती।
- फोटो : AMAR UJALA
मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती।