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शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनाया जाना गलत

Sun, 22 Dec 2013 05:49 AM IST
Champawat
Champawat Updated Sun, 22 Dec 2013 05:49 AM IST
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लोहाघाट। उत्तराखंड रचनात्मक शिक्षक मंडल की ओर से स्थानीय बीआरसी में ‘विद्यालयों में क्या हो शिक्षण का माध्यम’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में शिक्षकों का कहना था कि अंग्रेजी विषय की पढ़ाई तो ठीक है, लेकिन शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनाए जाने से बच्चों की रचनात्मकता और सृजनात्मक क्षमता समाप्त हो जाएगी। मुख्य वक्ता राज्य समन्वयक नवेंदु मठपाल ने कहा कि शिक्षा के निजीकरण, एनजीओई करण, पीपीपी करण की ओर धकेलने के लिए अनेक साजिशें की जा रही हैं। राष्ट्र भाषा हिंदी से विमुख करने की एक सोच पैदा की जा रही है।
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डीईओ बेसिक आनंद भारद्वाज और डायट के प्राचार्य डा. टीसी सती ने रचनात्मक शिक्षक मंडल की इस पहल का स्वागत करते हुए शिक्षा के प्रति हो रहे नए प्रयोगों पर चर्चा परिचर्चा जारी रखने पर जोर दिया। गोविंद बोहरा की अध्यक्षता और जिला संयोजक सुनील पांडेय के संचालन में हुई गोष्ठी में शिक्षकों से अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का भी संदेश दिया गया। इस मौके पर बीईओ गोपाल राम आर्य, आनंद ओली, कुंवर सिंह प्रथोली समेत तमाम शिक्षकों ने भागीदारी की।
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