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पाटी ब्लाक की स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे
Champawat
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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लोहाघाट। पाटी ब्लाक की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। ब्लाक मुख्यालय समेत टांण, रीठासाहिब, बाराहीधाम देवीधुरा एवं खेतीखान के राजकीय चिकित्सालयों में मात्र एक डाक्टर कार्यरत है। उनकी मूल पोस्टिंग तो खेतीखान में है, लेकिन प्रति सप्ताह मंगलवार, बृहस्पतिवार एवं शनिवार को पाटी तथा शेष दिनों खेतीखान में सेवाएं देने की सीएमओ ने व्यवस्था की है। शेष चिकित्सालयों का संचालन फार्मासिस्ट कर रहे हैं। ब्लाक मुख्यालय के चिकित्सालय की हालत बेहद खराब हो गई है। यहां वार्डब्यवाय के रिटायर होने के बाद केवल एक फार्मासिस्ट एवं स्टाफ नर्स के सहारे चिकित्सालय चल रहा है।
यही स्थिति यहां के एएनएम केंद्रों की है। ब्लाक अंतर्गत 21 एएनएम केंद्रों में मात्र पनियां, भुम्वाड़ी एवं कानाकोट में फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। मंगललेख की फार्मासिस्ट परीक्षा राणा को देवीधुरा एवं भिंगराडा के दीपक गोस्वामी को रीठासाहिब अस्पताल में संबद्ध किया गया है। लधिया घाटी के राजकीय चिकित्सालय की स्थिति और भी खराब है। 15 हजार की आबादी वाले घाटी क्षेत्र के अलावा यहां नैनीताल जिले के लोग भी उपचार के लिए आते हैं, लेकिन कोई व्यवस्था न होने से यहां अकाल मौतें हो रही हैं। संक्रामक रोगों की दृष्टि से पाटी काफी संवेदनशील ब्लाक माना जाता है। डसिया, चौड़ाकोट, पटनगांव, कूंण भुम्वाड़ी, रीठा खाल, चौड़ा, साल, टांण, मछियाड़ आदि क्षेत्रों में संक्रामक रोग कब पैदा हो जाएं, उसका कोई ठिकाना नहीं है। इस अव्यवस्था के चलते अब लोगों के धैर्य की सीमा टूटती जा रही है।
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यही स्थिति यहां के एएनएम केंद्रों की है। ब्लाक अंतर्गत 21 एएनएम केंद्रों में मात्र पनियां, भुम्वाड़ी एवं कानाकोट में फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। मंगललेख की फार्मासिस्ट परीक्षा राणा को देवीधुरा एवं भिंगराडा के दीपक गोस्वामी को रीठासाहिब अस्पताल में संबद्ध किया गया है। लधिया घाटी के राजकीय चिकित्सालय की स्थिति और भी खराब है। 15 हजार की आबादी वाले घाटी क्षेत्र के अलावा यहां नैनीताल जिले के लोग भी उपचार के लिए आते हैं, लेकिन कोई व्यवस्था न होने से यहां अकाल मौतें हो रही हैं। संक्रामक रोगों की दृष्टि से पाटी काफी संवेदनशील ब्लाक माना जाता है। डसिया, चौड़ाकोट, पटनगांव, कूंण भुम्वाड़ी, रीठा खाल, चौड़ा, साल, टांण, मछियाड़ आदि क्षेत्रों में संक्रामक रोग कब पैदा हो जाएं, उसका कोई ठिकाना नहीं है। इस अव्यवस्था के चलते अब लोगों के धैर्य की सीमा टूटती जा रही है।
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