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नेपाली महिलाओं ने धूमधाम से मनाया ऋषि पंचमी पर्व
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:12 PM IST
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बनबसा (चंपावत)। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल की महिलाओं ने ऋषि पंचमी पर्व बनबसा में पवित्र शारदा तट पर स्नान कर परंपरागत ढंग से मनाया। दिनभर में करीब दस हजार से अधिक नेपाली महिलाओं और युवतियों ने बनबसा सीमा पर पवित्र शारदा में स्नान कर पूजा अर्चना की।
ऋषि पंचमी पर्व भारत के अलावा नेपाल में भी परंपरागत ढंग से मनाया गया। शुक्रवार को यहां बनबसा में शारदा (नेपाल में जिसे महाकाली कहते हैं) तट पर ऋषि पंचमी पर्व पर सुबह से ही मेला लगा रहा। महिलाओं और कुंवारी कन्याओं, युवतियों ने शारदा पर पवित्र स्नान किया। सुहागिन महिलाओं ने ऋषि पंचमी पर्व पर अपने पति की लंबी आयु, धनधान्य और वैभव की प्राप्ति की कामना की, जबकि अविवाहितों ने सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए पूजा की।
पं. शेखर चंद्र द्विवेदी बताते हैं कि हड़तालिका निर्जला व्रत की कथा देवी पार्वती से जुड़ी है। भगवान भोलेनाथ (शिव) को पति के रूप में पाने को देवी पार्वती ने 12 वर्षों तक लंबी तपस्या की थी। इसी परंपरा को आज भी महिलाएं निभाते हुए ऋषि पंचमी पर उपवास कर अपने पति की दीर्घायु और वैभव की कामना करती हैं। इस मौके पर नेपाली महिलाओं की भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा के तहत पुलिस, तैराक पुलिस, एसएसबी जवान और कस्टम स्टाफ भी नदी तट पर सुरक्षा में तैनात रहा।
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ऋषि पंचमी पर्व भारत के अलावा नेपाल में भी परंपरागत ढंग से मनाया गया। शुक्रवार को यहां बनबसा में शारदा (नेपाल में जिसे महाकाली कहते हैं) तट पर ऋषि पंचमी पर्व पर सुबह से ही मेला लगा रहा। महिलाओं और कुंवारी कन्याओं, युवतियों ने शारदा पर पवित्र स्नान किया। सुहागिन महिलाओं ने ऋषि पंचमी पर्व पर अपने पति की लंबी आयु, धनधान्य और वैभव की प्राप्ति की कामना की, जबकि अविवाहितों ने सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए पूजा की।
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पं. शेखर चंद्र द्विवेदी बताते हैं कि हड़तालिका निर्जला व्रत की कथा देवी पार्वती से जुड़ी है। भगवान भोलेनाथ (शिव) को पति के रूप में पाने को देवी पार्वती ने 12 वर्षों तक लंबी तपस्या की थी। इसी परंपरा को आज भी महिलाएं निभाते हुए ऋषि पंचमी पर उपवास कर अपने पति की दीर्घायु और वैभव की कामना करती हैं। इस मौके पर नेपाली महिलाओं की भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा के तहत पुलिस, तैराक पुलिस, एसएसबी जवान और कस्टम स्टाफ भी नदी तट पर सुरक्षा में तैनात रहा।
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