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सीमांत रियांसी बमनगांव के सीम तोक में खनन का विरोध
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:05 AM IST
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चंपावत।
जिले के सीमांत रियांसी बमनगांव के सीम तोक में जिला प्रशासन की ओर से रेता, बजरी, पत्थर खनन, चुगान की अनुमति देने का विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंप कर खनन की अनुमति निरस्त न किए जाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन के लिए प्रस्तावित स्थल में उनकी कृषि भूमि है, जिसमें खेती की जाती है। खनन होने की सूरत में ग्रामीणों के ऊपर हर समय भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा वन संपदा को भी नुकसान पहुंचेगा। ग्रामीणों का कहना है कि सीम तोक के बीच एसएसबी की चौकी भी है, जो नेपाल सीमा की सुरक्षा के कार्य में लगी है। खनन शुरू होने से एसएसबी की चौकी में भी सुरक्षा व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने खनन अनुमति को निरस्त न करने पर आंदोलन शुरू करने और न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी दी है। डीएम को ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, जीवन सिंह, पवन सिंह, धन सिंह, देव सिंह, विश्राम सिंह, दीपक सिंह, विकास सिंह, राकेश सिंह आदि ग्रामीण शामिल रहे।
जिले के सीमांत रियांसी बमनगांव के सीम तोक में जिला प्रशासन की ओर से रेता, बजरी, पत्थर खनन, चुगान की अनुमति देने का विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंप कर खनन की अनुमति निरस्त न किए जाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन के लिए प्रस्तावित स्थल में उनकी कृषि भूमि है, जिसमें खेती की जाती है। खनन होने की सूरत में ग्रामीणों के ऊपर हर समय भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा वन संपदा को भी नुकसान पहुंचेगा। ग्रामीणों का कहना है कि सीम तोक के बीच एसएसबी की चौकी भी है, जो नेपाल सीमा की सुरक्षा के कार्य में लगी है। खनन शुरू होने से एसएसबी की चौकी में भी सुरक्षा व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने खनन अनुमति को निरस्त न करने पर आंदोलन शुरू करने और न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी दी है। डीएम को ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, जीवन सिंह, पवन सिंह, धन सिंह, देव सिंह, विश्राम सिंह, दीपक सिंह, विकास सिंह, राकेश सिंह आदि ग्रामीण शामिल रहे।
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