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विश्व मजदूर दिवस:पानी की कमी से पैदल हो गए सैकड़ों मजदूर
Updated Mon, 30 Apr 2018 10:56 PM IST
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चंपावत। काम होने के बावजूद जिले में काफी संख्या में मजदूर काम से हाथ धो बैठे हैं। चंपावत जिले में ही 130 से अधिक श्रमिकों का काम छूट गया है। इनमें से अधिकांश मजदूर अब बोरिया-बिस्तर बांधकर यहां से अपने-अपने घरों को चल दिए हैं।
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को न काम से निकाला गया है और नहीं उनकी छंटनी हुई है, मगर फिर भी वे काम नहीं कर पा रहे हैं। काम नहीं कर पाने की वजह है पानी का जबर्दस्त संकट। पानी की कमी निर्माण कार्यों को प्रभावित कर रही है। निर्माण कार्य बंद होने से खुद-ब-खुद मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। अप्रैल के दूसरे हफ्ते के बाद से चंपावत, लोहाघाट, बाराकोट, पाटी क्षेत्र के अधिकांश काम बंद हो गए हैं। जिस कारण मजदूरों की घर-गृहस्थी चल पाना कठिन हो रहा था। वासु, छोरी लाल, सनमा, शकुनी प्रसाद, राज किशोर सहित 130 से ज्यादा मजदूर रुपयों की तंगी के चलते अपने घरों को चल दिए हैं। ये मजदूर बिहार के मोतिहारी, छपरा, दरभंगा, बुंदेलखंड आदि इलाकों के रहने वाले हैं।
मजदूर नेता भोला पासवान का कहना है कि जिले में 1400 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से अब 30 प्रतिशत को भी काम नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि घर गए मजदूर पानी की कमी दूर होने के बाद वापस आएंगे।
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भवन निर्माण सामग्री में आ रही गिरावट
जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों बड़े पैमाने पर काम लटक गया है। कृष्णा, श्याम लाल, सुरेश जोशी, भुवन चंद्र सहित 29 से अधिक लोगों के निर्माण कार्य लटक गए हैं। अधिकांश मकान लिंटर तक बन चुके हैं मगर अब पानी की कमी से काम रुक गया है। देरी की वजह से निर्माण की लागत में भी इजाफा होगा। निर्माण कार्य बंद होने से मजदूरों को बेरोजगारी का झटका लगा है। वहीं कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है। हार्डवेयर व्यवसायियों का भी कहना है कि सीमेंट, सरिया, रेत-बजरी सहित तमाम भवन निर्माण सामग्री की बिक्री में 40 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
चंपावत जिले के नगरीय क्षेत्रों में रोजाना 67 लाख लीटर पानी की जरूरत है, मगर इस वक्त बमुश्किल 32 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। पेयजल की आपूर्ति के लिए विभाग टैंकर और अन्य वैकल्पिक उपाय कर रहा है। साथ ही पानी की किल्लत को देखते हुए निजी निर्माण कार्य न कराने की अपील की गई है।
- अशोक कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।
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निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को न काम से निकाला गया है और नहीं उनकी छंटनी हुई है, मगर फिर भी वे काम नहीं कर पा रहे हैं। काम नहीं कर पाने की वजह है पानी का जबर्दस्त संकट। पानी की कमी निर्माण कार्यों को प्रभावित कर रही है। निर्माण कार्य बंद होने से खुद-ब-खुद मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। अप्रैल के दूसरे हफ्ते के बाद से चंपावत, लोहाघाट, बाराकोट, पाटी क्षेत्र के अधिकांश काम बंद हो गए हैं। जिस कारण मजदूरों की घर-गृहस्थी चल पाना कठिन हो रहा था। वासु, छोरी लाल, सनमा, शकुनी प्रसाद, राज किशोर सहित 130 से ज्यादा मजदूर रुपयों की तंगी के चलते अपने घरों को चल दिए हैं। ये मजदूर बिहार के मोतिहारी, छपरा, दरभंगा, बुंदेलखंड आदि इलाकों के रहने वाले हैं।
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मजदूर नेता भोला पासवान का कहना है कि जिले में 1400 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से अब 30 प्रतिशत को भी काम नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि घर गए मजदूर पानी की कमी दूर होने के बाद वापस आएंगे।
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भवन निर्माण सामग्री में आ रही गिरावट
जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों बड़े पैमाने पर काम लटक गया है। कृष्णा, श्याम लाल, सुरेश जोशी, भुवन चंद्र सहित 29 से अधिक लोगों के निर्माण कार्य लटक गए हैं। अधिकांश मकान लिंटर तक बन चुके हैं मगर अब पानी की कमी से काम रुक गया है। देरी की वजह से निर्माण की लागत में भी इजाफा होगा। निर्माण कार्य बंद होने से मजदूरों को बेरोजगारी का झटका लगा है। वहीं कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है। हार्डवेयर व्यवसायियों का भी कहना है कि सीमेंट, सरिया, रेत-बजरी सहित तमाम भवन निर्माण सामग्री की बिक्री में 40 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
चंपावत जिले के नगरीय क्षेत्रों में रोजाना 67 लाख लीटर पानी की जरूरत है, मगर इस वक्त बमुश्किल 32 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। पेयजल की आपूर्ति के लिए विभाग टैंकर और अन्य वैकल्पिक उपाय कर रहा है। साथ ही पानी की किल्लत को देखते हुए निजी निर्माण कार्य न कराने की अपील की गई है।
- अशोक कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।