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डोबाभागू जीआईसी में एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति ठप
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लोहाघाट (चंपावत)। विकासखंड बाराकोट के राजकीय इंटर कॉलेज डोबाभागू में पिछले एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। भोजन माताओं को छात्र-छात्राओं के लिए मिड-डे बनाने के लिए तीन किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है।
पानी के अभाव में शौचालयों में ताले लटक गए हैं। अभिभावकों ने शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु न करने पर जल संस्थान के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रधानाचार्या जानकी चतुर्वेदी और अभिभावक शेखर तिवारी का कहना है कि विद्यालय में पिछले एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। इसके चलते विद्यालय के 150 छात्र-छात्राओं को पेयजल के अभाव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विद्यालय में 102 छात्र-छात्राओं के लिए मिड-डे मील बनाने के लिए भोजन माताएं करीब तीन किमी दूर अपने घरों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
उनका कहना है कि विद्यालय में पानी की आपूर्ति बाधित होने से विद्यालय के शौचालयों में ताले लटक गए हैं। तिवारी ने बताया कि विद्यालय की पेयजल योजना को सुचारु करने के लिए उनके द्वारा कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो सभी अभिभावक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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पानी के अभाव में शौचालयों में ताले लटक गए हैं। अभिभावकों ने शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु न करने पर जल संस्थान के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रधानाचार्या जानकी चतुर्वेदी और अभिभावक शेखर तिवारी का कहना है कि विद्यालय में पिछले एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। इसके चलते विद्यालय के 150 छात्र-छात्राओं को पेयजल के अभाव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विद्यालय में 102 छात्र-छात्राओं के लिए मिड-डे मील बनाने के लिए भोजन माताएं करीब तीन किमी दूर अपने घरों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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उनका कहना है कि विद्यालय में पानी की आपूर्ति बाधित होने से विद्यालय के शौचालयों में ताले लटक गए हैं। तिवारी ने बताया कि विद्यालय की पेयजल योजना को सुचारु करने के लिए उनके द्वारा कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो सभी अभिभावक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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