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पढ़ने वाले दस, स्टाफ आठ का
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:02 PM IST
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लंबे समय से लटका दिगालीचौड़ आईटीआई का भवन।
- फोटो : अमर उजाला
नेपाल सीमा से लगे दिगालीचौड़ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में पढ़ने वाले दस है और इनके लिए पूरा आठ का स्टाफ तैनात है। इस संस्थान में छात्र संख्या लगातार कम होती जा रही है। मात्र एक ही ट्रेड का होना भी इसका एक कारण माना जा रहा है। आईटीआई का भवन न होना भी एक कारण माना जा रहा है।
2006 में स्वीकृति मिलने के बाद यह आईटीआई पांच वर्ष बाद किराये के भवन में महज दो ट्रेड के साथ शुरू हुआ था। पहले सत्र में कुल 32 प्रशिक्षु थे। सितंबर 2016 से फिटर ट्रेड बंद है। अब यहां इलेक्ट्रिशियन ट्रेड का संचालन हो रहा है। प्रभारी शांति महरा का कहना है कि इस वक्त इसमें 10 छात्र पंजीकृत हैं।
अनुदेशक, फोरमैन, बाबू, स्टोर कीपर, स्वच्छक, चौकीदार सहित कुल आठ कर्मी हैं। गांव वालों से मिली 51 नाली भूमि में भवन निर्माण का कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन लंबे समय से यह कार्य लटका है। अब तक भवन निर्माण में 1.93 करोड रुपये खर्च हो चुके हैं। आगे धन नहीं मिलने से पिछले साल से काम लटका हुआ है। सरपंच नवीन जोशी का कहना है कि अपना भवन नहीं होने से आईटीआई के विस्तार में अड़चन आ रही है।
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2006 में स्वीकृति मिलने के बाद यह आईटीआई पांच वर्ष बाद किराये के भवन में महज दो ट्रेड के साथ शुरू हुआ था। पहले सत्र में कुल 32 प्रशिक्षु थे। सितंबर 2016 से फिटर ट्रेड बंद है। अब यहां इलेक्ट्रिशियन ट्रेड का संचालन हो रहा है। प्रभारी शांति महरा का कहना है कि इस वक्त इसमें 10 छात्र पंजीकृत हैं।
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अनुदेशक, फोरमैन, बाबू, स्टोर कीपर, स्वच्छक, चौकीदार सहित कुल आठ कर्मी हैं। गांव वालों से मिली 51 नाली भूमि में भवन निर्माण का कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन लंबे समय से यह कार्य लटका है। अब तक भवन निर्माण में 1.93 करोड रुपये खर्च हो चुके हैं। आगे धन नहीं मिलने से पिछले साल से काम लटका हुआ है। सरपंच नवीन जोशी का कहना है कि अपना भवन नहीं होने से आईटीआई के विस्तार में अड़चन आ रही है।
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