फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   7195 crore is being spent on a student

एक छात्र पर खर्च हो रहे 7195 रुपये

Sat, 27 Feb 2016 10:01 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sat, 27 Feb 2016 10:01 PM IST
विज्ञापन
7195 crore is being spent on a student

शिक्षकों की कमी के मामले हर मंच पर उठते हैं। चंपावत जिले के 611 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 20423 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 1550 शिक्षक हैं। जिले में करीब 10 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं, जहां कम छात्र होने के बावजूद अध्यापक बहुतायत में हैं। 10 से कम छात्र संख्या वाले इन 62 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में औसतन 3.47 छात्र में एक शिक्षक हैं।

विज्ञापन


अध्यापकों के वेतन में होने वाले खर्च की रकम को ही अगर आधार मानें, तो यहां एक छात्र पर हर महीने 7195 रुपये खर्च हो रहा है। स्कूलों की ये तस्वीर कोई आदर्श नहीं है, बल्कि विसंगति को दर्शाती है। इनमें से एक भी स्कूल पिछले महीने चयनित आदर्श स्कूलों की सूची में नहीं है।
विज्ञापन


हल्दुवा प्राथमिक विद्यालय में एक छात्र को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तैनात किए गए हैं, तो मचकुड़ी उच्च प्राथमिक स्कूल की तीन कक्षाओं में तो तीन छात्र तक नहीं हैं। छात्र नहीं होने से छठीं की कक्षा चलती नहीं है। यहां सातवीं और आठवीं कक्षा के एक-एक छात्र के लिए दो शिक्षक हैं। ऐसी स्थिति 20 दूसरे प्राथमिक स्कूलों की भी है, जहां कुल 77 छात्रों के लिए 31 गुरुजी हैं। वैसे जिले में कुल 57 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां मात्र 380 छात्र हैं, जबकि शिक्षकों की ये संख्या 105 है, अगर इसमें पांच जूनियर हाईस्कूलों को जोड़ दिया जाए, तो आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है। इन्हें मिलाकर 62 स्कूलों के 410 छात्रों को पढ़ाने के लिए 118 अध्यापक हैं। इन स्कूलों के शिक्षकों को 29.5 लाख रुपये से ज्यादा मासिक वेतन मिलता है। यानि मात्र वेतन के आधार पर ही एक छात्र की पढ़ाई पर हर महीने का खर्च 7195 रुपये हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तालाबंदी से बचा लिया स्कूल
मचकुड़ी उच्च प्राथमिक विद्यालय को दो छात्र पवन गड़कोटी और सुनीता जोशी ने बंद होने से बचा दिया है। यहां ये ही कुल दो छात्र-छात्रा हैं। पिछले साल छात्रों की 3 की संख्या से इस बार 1 कम हो गया। इन दो छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी दो ही है। पढ़ाई तो होती है, लेकिन कंप्यूटर होते हुए कंप्यूटर की पढ़ाई इन बच्चों को नहीं मिल पाती। दो कंप्यूटर हैं, दोनों ठीक भी हैं, लेकिन सिखाने वाले शिक्षक नहीं हैं।

कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के शिक्षकों को दूसरे जगह भेजने का प्रस्ताव किया जा रहा है। दस से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की सूची मुख्यालय भेजी गई है। ऐसे शिक्षकों को हरी झंडी मिलने के बाद अधिक छात्र और कम शिक्षक वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। -सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंपावत।


पांच जूनियर हाईस्कूल में छात्र संख्या दहाई भी नहीं
सरकारी स्कूलों से गांवों के लोगों का लगाव भी कम हो रहा है। जिले में पांच जूनियर हाईस्कूल तो ऐसे हैं, जहां छात्रों की संख्या दहाई तक नहीं पहुंच पा रही है। स्कूल चलो अभियान, मध्यान्ह भोजन योजना से लेकर यूनीफार्म तक निशुल्क मिलने के बावजूद ये आलम है। शिक्षा विभाग के मुताबिक चंपावत जिले के 101 जूनियर हाईस्कूलों में से पांच स्कूल ऐसे हैं, जहां दस से कम छात्र पढ़ रहे हैं। मचकुड़ी में 2, तपनीपाल में 4, भोखड़ा में 7, मिर्तोली में 8 और कोटकेंद्री में 9 छात्रों का पंजीकरण है। अलबत्ता इन स्कूलों के कुल 30 छात्रों को पढ़ाने के लिए कुल 13 शिक्षक हैं। जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण का कहना है कि दस छात्रों से कम संख्या वाले स्कूलों की सूची निदेशालय को भेजी गई है। अलबत्ता निदेशालय से अभी इन्हें किसी दूसरे स्कूल में विलय करने के कोई निर्देश विभाग को प्राप्त नहीं हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed