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केंद्रीय गृह मंत्री की बैठक में उठी सीमांत में नेटवर्क की दिक्कत
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:33 PM IST
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चंपावत। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 12 जुलाई को हुई बैठक में चंपावत के डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने नेपाल सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की समस्या उठाई।
कहा कि गुमदेश सहित चंपावत के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं होने से ग्रामीणों के साथ ही सीमा की सुरक्षा को तैनात सशस्त्र सीमा बल कर्मियों को भी परेशानी होती है। बीएसएनएल द्वारा नेटवर्क नहीं पहुंचाने की स्थिति में इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों के जरिये संचार सेवा पुख्ता की जा सकती है।
डीएम ने सीमावर्ती क्षेत्र से 50 किमी इलाके तक वन अधिनियम में शिथिलता को संवेदनशील दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए जरूरी बताया। इस जिले के दो विकासखंड चंपावत और लोहाघाट की करीब 90 किमी सीमा नेपाल से लगी है। इसके चलते इन दोनों विकासखंडों में 2001 से सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के जरिये सीमा से लगे क्षेत्रों में विकासपरक योजनाएं चलाई जाती हैं, मगर हर साल औसतन पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद सीमांत क्षेत्र के विकास की गति धीमी है।
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कहा कि गुमदेश सहित चंपावत के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं होने से ग्रामीणों के साथ ही सीमा की सुरक्षा को तैनात सशस्त्र सीमा बल कर्मियों को भी परेशानी होती है। बीएसएनएल द्वारा नेटवर्क नहीं पहुंचाने की स्थिति में इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों के जरिये संचार सेवा पुख्ता की जा सकती है।
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डीएम ने सीमावर्ती क्षेत्र से 50 किमी इलाके तक वन अधिनियम में शिथिलता को संवेदनशील दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए जरूरी बताया। इस जिले के दो विकासखंड चंपावत और लोहाघाट की करीब 90 किमी सीमा नेपाल से लगी है। इसके चलते इन दोनों विकासखंडों में 2001 से सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के जरिये सीमा से लगे क्षेत्रों में विकासपरक योजनाएं चलाई जाती हैं, मगर हर साल औसतन पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद सीमांत क्षेत्र के विकास की गति धीमी है।
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