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भाजपा नेता मदन सिंह महर ने पार्टी को अलविदा कहा
Updated Wed, 09 May 2018 10:56 PM IST
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चंपावत। निकाय चुनाव की तैयारियों में लगी भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाई को बुधवार को उस समय झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन सिंह महर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और विधायक कैलाश गहतोड़ी पर उनकी उपेक्षा करने आरोप लगाया है।
बुधवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए मदन सिंह महर ने कहा कि वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में उन्होंने बसपा से चुनाव लड़ा था। तब 27 फीसदी मतों के साथ वह दूसरे स्थान पर रहे। उसके बाद बसपा की नीति रास नहीं आने पर उन्होंने 2013 में बसपा को छोड़ दिया। वर्ष 2014 में लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर उन्होंने भाजपा का प्रचार किया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल करते हुए पूरा सम्मान दिए जाने तथा भविष्य में राजनीतिक पदों में दावेदारी देने समेत कई आश्वासन दिए।
लेकिन वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। बावजूद इसके उन्होंने चुनाव में पार्टी की तन मन धन से सेवा की और पार्टी प्रत्याशी कैलाश गहतोड़ी के लिए चुनाव प्रचार किया। उनका कहना है कि उनके समर्थकों को विधायक गहतोड़ी से काफी आशाएं थी, लेकिन एक साल में ही जनता इनसे उब गई है। एक साल के कार्यकाल में कोई कार्य नहीं होने और अपनी उपेक्षा के कारण वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।
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निकाय चुनाव में जनता की अदालत में जाऊंगा
चंपावत। भाजपा का दामन छोड़ चुके मदन महर का कहना है कि वह निकाय चुनाव में जनता की अदालत में जाएंगे। नगरपालिका टनकपुर की वोटर लिस्ट में नाम है, इसलिए टनकपुर से पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह किसी के हाथ का खिलौना नहीं बनेंगे, अब जो भी फैसले लेंगे काफी सोच समझ कर लेंगे।
कोट.....
मैंने कभी किसी की उपेक्षा नहीं की है। उनके लिए सभी कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी एक समान है। यदि ऐसे में कोई आरोप लगाता है तो क्या कहा जा सकता है। -कैलाश चंद्र गहतोड़ी, विधायक, चंपावत।
बुधवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए मदन सिंह महर ने कहा कि वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में उन्होंने बसपा से चुनाव लड़ा था। तब 27 फीसदी मतों के साथ वह दूसरे स्थान पर रहे। उसके बाद बसपा की नीति रास नहीं आने पर उन्होंने 2013 में बसपा को छोड़ दिया। वर्ष 2014 में लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर उन्होंने भाजपा का प्रचार किया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल करते हुए पूरा सम्मान दिए जाने तथा भविष्य में राजनीतिक पदों में दावेदारी देने समेत कई आश्वासन दिए।
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लेकिन वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। बावजूद इसके उन्होंने चुनाव में पार्टी की तन मन धन से सेवा की और पार्टी प्रत्याशी कैलाश गहतोड़ी के लिए चुनाव प्रचार किया। उनका कहना है कि उनके समर्थकों को विधायक गहतोड़ी से काफी आशाएं थी, लेकिन एक साल में ही जनता इनसे उब गई है। एक साल के कार्यकाल में कोई कार्य नहीं होने और अपनी उपेक्षा के कारण वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।
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निकाय चुनाव में जनता की अदालत में जाऊंगा
चंपावत। भाजपा का दामन छोड़ चुके मदन महर का कहना है कि वह निकाय चुनाव में जनता की अदालत में जाएंगे। नगरपालिका टनकपुर की वोटर लिस्ट में नाम है, इसलिए टनकपुर से पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह किसी के हाथ का खिलौना नहीं बनेंगे, अब जो भी फैसले लेंगे काफी सोच समझ कर लेंगे।
कोट.....
मैंने कभी किसी की उपेक्षा नहीं की है। उनके लिए सभी कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी एक समान है। यदि ऐसे में कोई आरोप लगाता है तो क्या कहा जा सकता है। -कैलाश चंद्र गहतोड़ी, विधायक, चंपावत।