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जिले के 64 परिवारों के पास शौचालय नहीं
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चंपावत में तहसील के पास बंद पड़ा हाईटेक शौचालय संवाद
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) होने के बावजूद जिले के 64 परिवारों के पास शौचालय नहीं है। वहीं वर्ष 2019 तक शौचालय बना चुके 1949 लोगों को अब भी प्रति परिवार 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है। इसके लिए स्वजल परियोजना को करीब 2.33 करोड़ रुपये चाहिए लेकिन इस राशि को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। परियोजना निदेशक एसके पंत का कहना है कि स्वजल निदेशालय से बजट की मांग की गई है।
चंपावत जिला नवंबर 2016 में ही ओडीएफ घोषित हो चुका है। 2012 के सर्वे के अनुसार जिले में 49209 परिवारों के लिए शौचालय बनाने का लक्ष्य नवंबर 2016 में हासिल किया जा चुका है। इसके बाद दो हजार शौचालय और बनाए गए। बावजूद इसके जिले के तल्लादेश, तल्लापाल, लधिया और गुमदेश क्षेत्र के 15 से अधिक गांवों में 64 परिवारों के पास अब भी शौचालय नहीं हैं। संवाद
एनएच ही नहीं चंपावत के शौचालयों में भी लटके हैं ताले
चंपावत/लोहाघाट/रीठा साहिब। जिले में सार्वजनिक शौचालयों की कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में ही 45 से अधिक शौचालय हैं लेकिन इनमें से 27 बंद हैं या पानी नहीं होने से उपयोग में नहीं आ रहे हैं। चंपावत तहसील का शौचालय तीन साल से बंद है। इसी तरह एनएच पर चल्थी में 2018-19 में पांच लाख से बना सार्वजनिक शौचालय तीन साल से बंद है। दस लाख से बने रीठा साहिब के शौचालय का 16 साल बाद भी उपयोग नहीं हो रहा है। अब यह शौचालय खंडहर बन गया है।
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लोहाघाट में रोडवेज बस स्टेशन और टैक्सी स्टैंड के पास बने सार्वजनिक शौचालयों में ताले लटके हैं। शहर में अन्य स्थानों पर भी शौचालय नहीं होने से दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को दिक्कत होती है। वहीं नगर पालिकाध्यक्ष गोविंद वर्मा का कहना है कि दोनों शौचालयों में कुछ काम बाकी है। इन्हें पूरा करा जल्द ही शुरू कराया जाएगा।
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चंपावत जिला नवंबर 2016 में ही ओडीएफ घोषित हो चुका है। 2012 के सर्वे के अनुसार जिले में 49209 परिवारों के लिए शौचालय बनाने का लक्ष्य नवंबर 2016 में हासिल किया जा चुका है। इसके बाद दो हजार शौचालय और बनाए गए। बावजूद इसके जिले के तल्लादेश, तल्लापाल, लधिया और गुमदेश क्षेत्र के 15 से अधिक गांवों में 64 परिवारों के पास अब भी शौचालय नहीं हैं। संवाद
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एनएच ही नहीं चंपावत के शौचालयों में भी लटके हैं ताले
चंपावत/लोहाघाट/रीठा साहिब। जिले में सार्वजनिक शौचालयों की कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में ही 45 से अधिक शौचालय हैं लेकिन इनमें से 27 बंद हैं या पानी नहीं होने से उपयोग में नहीं आ रहे हैं। चंपावत तहसील का शौचालय तीन साल से बंद है। इसी तरह एनएच पर चल्थी में 2018-19 में पांच लाख से बना सार्वजनिक शौचालय तीन साल से बंद है। दस लाख से बने रीठा साहिब के शौचालय का 16 साल बाद भी उपयोग नहीं हो रहा है। अब यह शौचालय खंडहर बन गया है।
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लोहाघाट में रोडवेज बस स्टेशन और टैक्सी स्टैंड के पास बने सार्वजनिक शौचालयों में ताले लटके हैं। शहर में अन्य स्थानों पर भी शौचालय नहीं होने से दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को दिक्कत होती है। वहीं नगर पालिकाध्यक्ष गोविंद वर्मा का कहना है कि दोनों शौचालयों में कुछ काम बाकी है। इन्हें पूरा करा जल्द ही शुरू कराया जाएगा।