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मनरेगा मजदूरों को दो महीने की मिली मजदूरी
Updated Thu, 06 Dec 2018 10:40 PM IST
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चंपावत। जिले में मनरेगा मजदूरों को दो महीने की मजदूरी मिल गई है। मजदूरों के खाते में एक सितंबर से 20 नवंबर तक की मजदूरी पहुंच चुकी है। 5600 मजदूरों के खाते में लगभग पांच करोड़ की धनराशि मिल पाई है। वर्तमान में जिले में 10684 के जॉब कार्ड हैं।
मनरेगा मजदूरों को दो महीने से मजदूरी नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मनरेगा में मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये की मजदूरी दी जाती है, लेकिन कम मजदूरी होने से अधिकांश लोग मनरेगा में कार्य नहीं कर रहे है। 2018 में अब तक 156 लोगों को सौ दिन का रोजगार मिल पाया है।
मजदूरी कम होने से मनरेगा में कार्य करने वाले की संख्या में प्रतिदिन कमी आ रही है। मनरेगा में काम कर रहे 1050 मजदूरों को सितंबर से मजदूरी नहीं मिल पाई थी। इसको देखते हुए मजदूरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। 20 नवंबर तक मजदूरों की धनराशि मिलने के बाद मजदूरों को कुछ हद तक राहत मिल गई है।
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कम मजदूरी के चलते छोड़ रहे मनरेगा का काम
चंपावत। मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी कम होने से अधिकांश लोगों ने काम छोड़ दिया है, जबकि खुले बाजार में मजदूरी करने पर 400 रुपये प्रतिदिन से अधिक की मजदूरी मिलती है। इसके चलते मजदूर मनरेगा के कार्य को छोड़ रहे है। जिले में मनरेगा में अधिकांश महिलाएं काम कर रही हैं। मनरेगा में ग्रामीण गरीब वर्ग की महिलाएं काम कर रही हैं। अधिकांश महिलाओं को मनरेगा से चाय बागान में काम मिल रहा है।
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मनरेगा मजदूरों को दो महीने से मजदूरी नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मनरेगा में मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये की मजदूरी दी जाती है, लेकिन कम मजदूरी होने से अधिकांश लोग मनरेगा में कार्य नहीं कर रहे है। 2018 में अब तक 156 लोगों को सौ दिन का रोजगार मिल पाया है।
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मजदूरी कम होने से मनरेगा में कार्य करने वाले की संख्या में प्रतिदिन कमी आ रही है। मनरेगा में काम कर रहे 1050 मजदूरों को सितंबर से मजदूरी नहीं मिल पाई थी। इसको देखते हुए मजदूरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। 20 नवंबर तक मजदूरों की धनराशि मिलने के बाद मजदूरों को कुछ हद तक राहत मिल गई है।
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कम मजदूरी के चलते छोड़ रहे मनरेगा का काम
चंपावत। मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी कम होने से अधिकांश लोगों ने काम छोड़ दिया है, जबकि खुले बाजार में मजदूरी करने पर 400 रुपये प्रतिदिन से अधिक की मजदूरी मिलती है। इसके चलते मजदूर मनरेगा के कार्य को छोड़ रहे है। जिले में मनरेगा में अधिकांश महिलाएं काम कर रही हैं। मनरेगा में ग्रामीण गरीब वर्ग की महिलाएं काम कर रही हैं। अधिकांश महिलाओं को मनरेगा से चाय बागान में काम मिल रहा है।