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तो चंपावत में घट रही बेरोजगारी!

Sat, 20 Jan 2018 10:21 PM IST
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:21 PM IST
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तो चंपावत में घट रही बेरोजगारी!

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चंपावत। चंपावत में बेरोजगारी का ग्राफ गिर रहा है। चौंकिये नहीं, मगर ये सच है। कम से कम सेवायोजन के आंकड़े तो यही बताते हैं। चंपावत जिले में एक साल में दो हजार से अधिक बेरोजगार कम हो गए।

एलटी शिक्षकों की 21 जनवरी को होने वाली परीक्षा के लिए चंपावत जिले से ही 1250 युवक-युवतियां शिरकत कर रहे हैं। ये संख्या जिले में बेरोजगारों की भयावहता को दर्शाती है। मगर इसके उलट सरकारी आंकड़े जिले में बेरोजगारी के कम होने के संकेत कर रहे हैं। एक साल में ही 2361 बेरोजगार कम हो गए। सेवायोजन विभाग के आंकड़ों में दिसंबर 2016 में चंपावत जिले में 25648 बेरोजगार दर्ज थे। वहीं एक वर्ष बाद दिसंबर 2017 में ये संख्या कम होकर 23287 हो गई।
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वहीं एक वर्ष में रोजगार पाने वालों की संख्या भी अधिक नहीं है। इस अवधि में महज 350 से भी कम लोगों को रोजगार मिल सका। इसमें से भी ज्यादातर लोग वे हैं, जिन्हें सेवायोजन विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले रोजगार मेलों के जरिए निजी क्षेत्र की कंपनियों में मामूली नौकरी मिली है। वैसे जिले में 18 वर्ष से 40 वर्ष आयु समूह के 54152 लोग हैं।
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इनमें बमुश्किल दो प्रतिशत लोगों को ही रोजगार मिल सका है। शेष लोग या तो पढ़ाई कर रहे हैं या बेरोजगार या पांच हजार रुपये से कम मासिक आमदनी वाले काम के जरिए गुजर-बसर कर रहे हैं। इधर बेरोजगार नवयुवकों का कहना है कि सेवायोजन विभाग के आंकड़ों का जमीनी हकीकत से कतई मेल नहीं हैं। रोजगार के हाल बेहद खराब है।
कोट
सेवायोजन कार्यालय में दर्ज आंकड़ों में बेरोजगारों की संख्या में कमी आई है। इसकी वजह कुछ लोगों का रोजगार पाना है। इसके अलावा काफी लोगों द्वारा तीन साल की समय सीमा पूरी होने के बाद सेवायोजन पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया गया है।
-आरके पंत, जिला सेवायोजन अधिकारी, चंपावत।

सितंबर 2014 से नहीं मिला बेरोजगारी भत्ता
बेरोजगारी भत्ता अभी औपचारिक रूप से बंद तो नहीं किया गया है। जिले में इसके पात्र आवेदकों को बीते 40 महीने से भत्ते के रूप में एक रुपया भी नहीं मिला है। सेवायोजन विभाग के मुताबिक सितंबर 2014 से भत्ता नहीं दिया गया है।

वैसे 1710 नौजवान बेरोजगारी भत्ते के लिए पात्र है। सेवायोजन विभाग द्वारा बजट की लगातार मांग की जाती रही, मगर तीन साल से अधिक समय से धन नहीं मिलने से इसके अस्तित्व पर सवाल उठ रहा है। इंटरमीडिएट या समकक्ष को 750, स्नातक या समकक्ष को 1000 और पीजी या समकक्ष को 1500 रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।
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