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नेपाल में किया जा रहा च्यूरा का पौधा रोपण
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:54 PM IST
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बनबसा (चंपावत)। नेपाल के डडेलधुरा जिले में इन दिनों च्यूरा के पौधों को लगाने का काम तेजी से चल रहा है। च्यूरा के पेड़ मिट्टी को जकड़ने का काम तो करते ही हैं साथ ही इसके फलों के बीज से तेल निकालकर वनस्पति घी बनाया जाता है।
डडेलधुरा स्थित परशुराम नगरपालिका-6 में हो रहे भूकटाव की रोकथाम को तराई भू परिधि ताल कोहलपुर बांके के आर्थिक सहयोग से च्यूरा के पौध लगाए जा रहे हैं। परशुराम नगरपालिका -12 जोगबुड़ा के अध्यक्ष कैलाश कुमार पांडेय ने बताया कि सिमलीखेत, सरकुंडा, ठन्नजाला क्षेत्र में उत्तम प्रजाति के च्यूरा के पौधे लगा दिए हैं। बाढ़ नियंत्रण परियोजना समिति के उपाध्यक्ष दल बहादुर साउंद ने बताया कि अब तीन सौ सैंतीस पौध लगाए जा चुके हैं। टनकपुर वासी डॉ. देवीदत्त जोशी ने राज्य सरकार से उत्तराखंड में च्यूरा के पौधों रोपण कराने की मांग की है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. जेबी चंद बताते हैं कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पहले खाना पकाने में च्यूरा के तेल का इस्तेमाल होता था। यह प्रोटीन की कमी को भी दूर करता है।
डडेलधुरा स्थित परशुराम नगरपालिका-6 में हो रहे भूकटाव की रोकथाम को तराई भू परिधि ताल कोहलपुर बांके के आर्थिक सहयोग से च्यूरा के पौध लगाए जा रहे हैं। परशुराम नगरपालिका -12 जोगबुड़ा के अध्यक्ष कैलाश कुमार पांडेय ने बताया कि सिमलीखेत, सरकुंडा, ठन्नजाला क्षेत्र में उत्तम प्रजाति के च्यूरा के पौधे लगा दिए हैं। बाढ़ नियंत्रण परियोजना समिति के उपाध्यक्ष दल बहादुर साउंद ने बताया कि अब तीन सौ सैंतीस पौध लगाए जा चुके हैं। टनकपुर वासी डॉ. देवीदत्त जोशी ने राज्य सरकार से उत्तराखंड में च्यूरा के पौधों रोपण कराने की मांग की है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. जेबी चंद बताते हैं कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पहले खाना पकाने में च्यूरा के तेल का इस्तेमाल होता था। यह प्रोटीन की कमी को भी दूर करता है।
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